भागवत के संबोधन से पहले ही इस कार्यक्रम को लेकर अमेरिका से लेकर भारत तक राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि भागवत अपने संबोधन में किन मुद्दों पर बात करेंगे और अमेरिका में संघ की भूमिका को किस तरह पेश करेंगे।
संतों और प्रमुख हस्तियों ने किया समर्थन
भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम को जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी समेत कई हस्तियों का समर्थन मिला है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने उनके अमेरिकी दौरे और कार्यक्रम को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
X अकाउंट सस्पेंड होने पर अखिलेश का तंज
कार्यक्रम के आयोजक ‘अहेड फोरम’ का X अकाउंट कुछ समय के लिए सस्पेंड होने के बाद अखिलेश यादव ने इस पर तंज किया। उन्होंने कहा, ‘विदेशों में जब Unregistered-Underground लोग उभरकर आएंगे तो उनके एक्स अकाउंट तो सस्पेंड किए ही जाएंगे।’
इसके बाद अखिलेश ने RSS से 21 सवाल पूछे। उन्होंने स्वदेशी का नारा देने वाले संगठन के प्रमुख के विदेश दौरे पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या भागवत वहां सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने गए हैं या फिर भविष्य में राजनीतिक प्रश्रय तलाशने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, कुछ समय बाद ‘अहेड फोरम’ का X अकाउंट बहाल हो गया। संस्था ने दावा किया कि विरोधियों के बॉट अटैक के कारण एल्गोरिदम प्रभावित हुआ था और इसी वजह से हैंडल अस्थायी रूप से ब्लॉक हो गया था।
कर्नाटक में RSS मार्च पर दो सरकारी शिक्षक सस्पेंड
इधर कर्नाटक में RSS के मार्च में शामिल होने को लेकर भी विवाद सामने आया है। राज्य में दो सरकारी शिक्षकों अन्ना साहेब देशमुख और गुरुराज जोशी को मार्च में शामिल होने पर सस्पेंड किया गया है।
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा कि किसी गैर-रजिस्टर्ड संगठन के कार्यक्रम में सरकारी कर्मचारियों की भागीदारी नियमों के खिलाफ है। वहीं विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष सी. नारायणस्वामी ने सरकार की कार्रवाई को बदले की भावना से प्रेरित बताया। उनका कहना था कि RSS कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है और देश का कोई भी देशभक्त किसी देशभक्त संगठन से जुड़ सकता है।
न्यूयॉर्क के मेयर ने भी जताया विरोध
मोहन भागवत के कार्यक्रम को लेकर न्यूयॉर्क में भी विरोध की आवाज उठी है। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होने वाले कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते।
हालांकि, प्रदर्शन या कार्यक्रम रद्द किए जाने से जुड़े सवाल पर ममदानी ने कहा कि यह एक निजी कार्यक्रम है। इसलिए इसे रद्द करने का अधिकार या क्षेत्राधिकार संभवतः सिटी अथॉरिटी के पास नहीं है।
अब निगाहें भागवत के संबोधन पर
एक तरफ कार्यक्रम को वैश्विक सौहार्द और सार्वभौमिक एकता से जोड़कर पेश किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर भारत और अमेरिका दोनों जगह राजनीतिक बहस शुरू हो चुकी है। ऐसे में अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि मैडिसन स्क्वायर गार्डन से मोहन भागवत अपने संबोधन में संघ, भारत और वैश्विक समाज को लेकर क्या संदेश देते हैं।
