बुधवार के सत्र की शुरुआत हालांकि सकारात्मक रुख के साथ हुई थी। सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के 77,656.09 अंक के स्तर से 236 अंक की बढ़त के साथ 77,892.10 अंक पर खुला। शुरुआती कारोबार में खरीदारी बढ़ने से यह 330.75 अंक तक चढ़कर 77,986.84 अंक के इंट्रा-डे उच्च स्तर पर पहुंच गया। हालांकि बाद में बाजार की शुरुआती बढ़त कायम नहीं रह सकी और सूचकांक फिसलकर 77,472.94 अंक के दिन के निचले स्तर पर बंद हुआ।
निफ्टी 50 भी 24,334.55 अंक के पिछले बंद स्तर की तुलना में मामूली बढ़त के साथ 24,341.95 अंक पर खुला। कारोबार के दौरान यह 24,378.60 अंक के उच्च स्तर तक पहुंचा, लेकिन बाद में बिकवाली का दबाव बढ़ने से 24,207.75 अंक के निचले स्तर तक आ गया। अंत में निफ्टी 0.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
व्यापक बाजार में भी एक समान रुख नहीं रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.81 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि बड़े शेयरों में दबाव के बावजूद कुछ छोटे शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही।
सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी आईटी इंडेक्स सबसे कमजोर क्षेत्रों में रहा। एफएमसीजी, ऑटो और रियल्टी शेयरों पर भी दबाव देखा गया। इसके विपरीत मेटल, प्राइवेट बैंक और सीमेंट से जुड़े शेयरों में मजबूती रही। बैंकिंग और मेटल क्षेत्र की कुछ कंपनियों में खरीदारी ने बाजार की गिरावट को सीमित करने में मदद की।
निफ्टी 50 के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक, जेएसडब्ल्यू स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी लाइफ और एसबीआई लाइफ शामिल रहे। दूसरी ओर भारती एयरटेल, पावरग्रिड, इंफोसिस, एलएंडटी, नेस्ले इंडिया और श्रीराम फाइनेंस कमजोर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख शेयरों में रहे।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, शुरुआती बढ़त के बाद अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग रुझान बनने से प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ा। वैश्विक बाजारों के संकेतों के साथ कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाक्रम भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहे।
ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों में संभावित ढील से महंगाई को लेकर कुछ चिंताएं कम होने की बात कही गई। इससे घरेलू बॉन्ड यील्ड में नरमी और बैंकिंग शेयरों में मजबूती देखने को मिली। बेहतर कमाई की उम्मीदों से मेटल शेयरों में भी खरीदारी रही। हालांकि आईटी शेयरों में गिरावट ने इन क्षेत्रों की तेजी का असर काफी हद तक कम कर दिया।
अमेरिका में आव्रजन नियमों को लेकर सख्ती और वीजा अपॉइंटमेंट से जुड़े घटनाक्रम के कारण आईटी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव की आशंकाएं बनी हुई हैं। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी महंगाई के प्रमुख आंकड़ों पर रहेगी। विशेष रूप से कोर पीसीई आंकड़ों से ब्याज दरों की दिशा को लेकर बाजार को संकेत मिलने की उम्मीद है। इन आंकड़ों के आधार पर वैश्विक निवेश धारणा और उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह की दिशा प्रभावित हो सकती है।
