इला अरुण ने कहा कि लोगों ने उनके कई अन्य गीतों और एल्बमों को उस तरह नहीं सुना, जिस तरह एक चर्चित फिल्मी गीत को सुना गया। उनका मानना है कि सिनेमा का प्रभाव बहुत व्यापक होता है और किसी एक लोकप्रिय गीत या किरदार के आधार पर कलाकार की पूरी पहचान तय कर देना उचित नहीं है।
उन्होंने अपने अभिनय करियर के अलग-अलग किरदारों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक कलाकार को लगातार नई भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं। उन्होंने स्क्रीन पर मां, सौतेली मां, मजबूत महिला और वेश्या जैसे अलग-अलग किरदार निभाए हैं, लेकिन इनमें से कोई भी भूमिका उनकी वास्तविक व्यक्तिगत पहचान को परिभाषित नहीं करती। उनके अनुसार कलाकार के किरदार और उसके निजी व्यक्तित्व के बीच अंतर समझना जरूरी है।
समाज और महिलाओं के रिश्ते पर इला अरुण ने कहा कि वह न तो समाज के दबाव में रहती हैं और न ही समाज को पूरी तरह नजरअंदाज करती हैं। उनका मानना है कि व्यक्ति और समाज साथ-साथ चलते हैं। उन्होंने खास तौर पर महिलाओं द्वारा मिले समर्थन और प्यार को महत्वपूर्ण बताया।
फिल्म उद्योग में महिलाओं के साथ भेदभाव के सवाल पर इला ने अपने अनुभव को अलग तरीके से रखा। उन्होंने कहा कि बतौर चरित्र कलाकार उन्हें व्यक्तिगत तौर पर ऐसा भेदभाव बहुत अधिक महसूस नहीं हुआ, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उनके दौर में महिलाओं को लेकर सोच में अंतर नहीं था। उन्होंने कहा कि पहले महिलाओं के लिए केंद्रित और मजबूत भूमिकाओं वाली कहानियां अपेक्षाकृत कम लिखी जाती थीं।
इला के अनुसार, समय के साथ इस स्थिति में बदलाव आया है। अब महिलाओं को केंद्र में रखकर कहानियां लिखी जा रही हैं और महिला प्रधान भूमिकाओं के लिए पहले की तुलना में अधिक अवसर दिखाई देते हैं। उनका मानना है कि दर्शकों की पसंद भी इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि दर्शक महिलाओं की मजबूत कहानियों वाली फिल्में देखते हैं तो फिल्म उद्योग भी ऐसी परियोजनाओं में निवेश करने के लिए आगे आता है।
देश में महिलाओं की स्थिति पर इला अरुण ने कहा कि पूरे भारत को एक ही नजरिए से देखना संभव नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में परिस्थितियां अलग हैं। उन्होंने माना कि कई जगहों पर आज भी लड़कियों को शिक्षा नहीं मिलती और कम उम्र में विवाह जैसी समस्याएं मौजूद हैं, लेकिन इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि देश धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने पुरुषों के नजरिए में भी बदलाव की बात कही। उनके अनुसार आज कई पुरुष अधिक संवेदनशील हो रहे हैं, परिवार में जिम्मेदारियां साझा कर रहे हैं और अपनी पत्नियों तथा बच्चों के प्रति सहयोगी भूमिका निभा रहे हैं।
फेमिनिज्म पर इला अरुण ने संतुलित दृष्टिकोण रखने की बात कही। उन्होंने महिलाओं के अधिकार और बराबरी की जरूरत को स्वीकार किया, लेकिन कहा कि किसी भी विचार का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार बराबरी का अर्थ किसी के साथ अनुचित व्यवहार करना या जिम्मेदारी से मुक्त हो जाना नहीं है।
उन्होंने महिलाओं के शोषण के मामलों में आवाज उठाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि पेशेवर जीवन में गलत व्यवहार का सामना करने वाली कई महिलाएं डर या दबाव के कारण बोल नहीं पातीं। ऐसी महिलाओं के लिए समाज और अन्य लोगों को आगे आकर समर्थन देना चाहिए। इला के विचारों में महिला समानता का अर्थ अधिकारों के साथ जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और एक दूसरे के समर्थन से जुड़ा हुआ है।
