अपने छात्र जीवन को याद करते हुए ज्ञानेश कुमार ने कहा कि विद्यालय केवल किताबी ज्ञान हासिल करने की जगह नहीं होता, बल्कि यह व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। उनके अनुसार, अच्छे शिक्षक, अनुशासन और विद्यालय का वातावरण विद्यार्थियों के सोचने और आगे बढ़ने के तरीके को प्रभावित करते हैं। उन्होंने अपने जीवन में विद्यालय से मिली सीख को भी याद किया।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि स्कूल और कॉलेज का समय जीवन के सबसे महत्वपूर्ण दौर में शामिल होता है। इसी दौरान व्यक्ति के विचार, व्यवहार और भविष्य की दिशा तय होने लगती है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने शिक्षकों की बातों और विद्यालय में मिलने वाले अनुभवों को गंभीरता से लें और उनसे सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखें।
विद्यार्थियों के साथ बातचीत में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मतदान केवल संवैधानिक अधिकार नहीं है, बल्कि देश के भविष्य के निर्माण में नागरिकों की भागीदारी का माध्यम भी है। जागरूक और जिम्मेदार मतदाता लोकतंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ज्ञानेश कुमार ने विद्यार्थियों को मताधिकार से जुड़ी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि कक्षा 11वीं और 12वीं में पढ़ने वाले कई विद्यार्थी आने वाले वर्षों में पहली बार मतदान करने की उम्र में पहुंचेंगे। ऐसे में उनके लिए अभी से चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक मूल्यों की समझ विकसित करना उपयोगी होगा।
संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने चुनाव प्रक्रिया, मतदाता बनने की पात्रता, मतदान और निष्पक्ष चुनाव से जुड़े सवाल पूछे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने उनकी जिज्ञासाओं का जवाब देते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं में युवाओं की सक्रिय भागीदारी के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए नागरिकों का जागरूक होना आवश्यक है।
कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज पहुंचने पर ज्ञानेश कुमार ने अपने पुराने दिनों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ से उनका पुराना और गहरा संबंध रहा है। शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा की दिशा में कदम बढ़ाया और अब लंबे अंतराल के बाद उसी विद्यालय में विद्यार्थियों के बीच लौटना उनके लिए विशेष अनुभव रहा।
उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि जीवन के अलग-अलग चरण व्यक्ति को अलग-अलग अनुभव देते हैं। वर्तमान समय उनके लिए सीखने और अपने भविष्य की नींव मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि विद्यालय से मिलने वाली शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए अनुशासन, चुनौतियों का सामना करने का साहस और सही विचारों को अपनाने की क्षमता भी विकसित करती है।
इस मुलाकात को ज्ञानेश कुमार ने अतीत और वर्तमान के बीच संवाद जैसा अनुभव बताया। एक समय वह स्वयं इसी विद्यालय के विद्यार्थी थे और अब उसी परिसर में विद्यार्थियों को लोकतंत्र और नागरिक जिम्मेदारियों के बारे में बता रहे थे। कार्यक्रम में चुनावी साक्षरता और जागरूक मतदाता बनने का संदेश प्रमुख रहा। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों को देखते हुए युवा विद्यार्थियों के बीच लोकतांत्रिक जागरूकता बढ़ाने की यह पहल विशेष महत्व रखती है।
