मुकाबले की शुरुआत से ही नीदरलैंड्स ने आक्रामक तेवर दिखाए। मैच के दूसरे मिनट में ही मेजबान टीम को पेनल्टी कॉर्नर मिला और यिब्बी जानसेन ने इसे गोल में बदलकर भारत पर शुरुआती दबाव बना दिया। भारत ने इसके बाद खेल को संभालने की कोशिश की लेकिन नीदरलैंड्स ने गेंद पर अपना नियंत्रण बनाए रखा और भारतीय खिलाड़ियों को लगातार रक्षात्मक स्थिति में रखा। भारतीय गोलकीपर और डिफेंस ने कई मौकों पर शानदार बचाव किया लेकिन मेजबान टीम के आक्रमण को पूरी तरह रोकना आसान नहीं था।
दूसरे हाफ में नीदरलैंड्स ने एक बार फिर पेनल्टी कॉर्नर के जरिए भारत की मुश्किल बढ़ा दी। 38वें मिनट में फ्रेडरिके मातला ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर मेजबान टीम की बढ़त 2-0 कर दी। इसके बाद भारतीय टीम ने वापसी के लिए कई प्रयास किए लेकिन डच रक्षापंक्ति ने भारतीय फॉरवर्ड्स को ज्यादा मौके नहीं दिए। भारत के पास कुछ अवसर जरूर आए लेकिन उन्हें गोल में बदलने में टीम नाकाम रही।
इस मुकाबले में भारत की सबसे बड़ी परेशानी आक्रमण में नजर आई। टीम को गोल के मौके बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा जबकि नीदरलैंड्स ने अपने पेनल्टी कॉर्नर का बेहतर इस्तेमाल किया। खास तौर पर मैच के शुरुआती चरण में मिला दबाव भारतीय टीम के लिए भारी पड़ा। हालांकि भारतीय डिफेंस ने पूरे मुकाबले में हार नहीं मानी और लगातार नीदरलैंड्स के हमलों का सामना करता रहा।
अब भारतीय टीम के सामने सबसे अहम चुनौती ऑस्ट्रेलिया की है। रविवार 23 अगस्त को होने वाला यह मुकाबला भारत के लिए करो या मरो जैसा बन गया है। भारत को सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए ऑस्ट्रेलिया को हराना जरूरी होगा। नीदरलैंड्स के खिलाफ हार के बाद भारत के खाते में एक अंक है जबकि ऑस्ट्रेलिया भी चीन के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ के बाद एक अंक पर है। चीन के दो अंक हैं जबकि नीदरलैंड्स छह अंकों के साथ मजबूत स्थिति में पहुंच चुका है।
भारत ने विश्व कप के पहले दौर में चीन के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ खेला था और इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ के जरिए दूसरे दौर में जगह बनाई थी। पूल डी में भारत चीन के बाद दूसरे स्थान पर रहा था। अब टीम के सामने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐसा प्रदर्शन करने की चुनौती है जिसमें डिफेंस के साथ आक्रमण में भी बेहतर तालमेल नजर आए।
नीदरलैंड्स के खिलाफ हार ने निश्चित रूप से भारत की सेमीफाइनल की राह कठिन कर दी है लेकिन टीम की उम्मीदें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत भारत को फिर से मजबूत स्थिति में ला सकती है। ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों को पेनल्टी कॉर्नर के साथ गोल करने के मौकों को भुनाने और शुरुआती दबाव से बचने पर खास ध्यान देना होगा। अब टूर्नामेंट में भारत का अगला मुकाबला ही उसकी आगे की राह तय करेगा।
