मुरैना में संत रविदास जयंती के अवसर पर आयोजित समरसता संकल्प अभियान और यात्रा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जाति का बंधन भगवान ने नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि समाज में अपनी व्यवस्था के लिए लोगों ने जाति व्यवस्था बनाई थी लेकिन बाद में इसके स्वरूप को बिगाड़ने और तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा देने का काम नेताओं ने अपने स्वार्थ के लिए किया। तोमर के इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। संत रविदास के विचारों में सामाजिक समरसता और समानता का संदेश प्रमुख रहा है और इसी विचार को लेकर समरसता से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
तोमर का दूसरा अंदाज तब देखने को मिला जब उन्होंने मुरैना के कैलारस से वीरपुर के बीच हाल ही में शुरू हुई मेमू ट्रेन में आम यात्रियों के साथ सफर किया। ट्रेन के अलग अलग स्टेशनों पर रुकने के दौरान उन्होंने लोगों को संबोधित भी किया। ट्रेन के अंदर खड़े होकर माइक से संबोधन के वीडियो सामने आने के बाद इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। राजनीतिक कार्यक्रमों में नेताओं के भाषण और जनसंपर्क के इस अंदाज को लेकर लोग अपने अपने तरीके से टिप्पणी कर रहे हैं।
इधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी की सरकार पर हमला बोलते हुए ट्रेन का ही उदाहरण इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी एक ऐसी ट्रेन बन गई है जिसमें डिब्बे कहते हैं कि इंजन हटा दो और इंजन कहता है कि डिब्बों को बदल दूंगा। पटवारी ने आरोप लगाया कि इस कथित खींचतान के बीच सबसे ज्यादा परेशानी आम जनता को हो रही है। उनके बयान की पुष्टि हालिया मीडिया रिपोर्टों में भी हुई है।
पटवारी ने आरोप लगाया कि बीजेपी के बड़े नेता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिलाफ दिल्ली तक जा रहे हैं जबकि दूसरी तरफ मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल में बदलाव की बात कर रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इसी राजनीतिक स्थिति को इंजन और डिब्बों के बीच चल रही लड़ाई बताया। यह बयान विपक्ष की ओर से बीजेपी सरकार पर किया गया राजनीतिक हमला है और इसे इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
पटवारी ने सरकार को घेरते हुए शिक्षा व्यवस्था और महंगाई जैसे मुद्दे भी उठाए। उन्होंने स्कूलों की स्थिति को लेकर कांग्रेस के जरिए जमीनी अभियान चलाने की बात कही और सरकार से शिक्षा व्यवस्था पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों और सांची दूध के दामों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।
इस पूरे घटनाक्रम में दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सामाजिक समरसता और जातिगत भेदभाव के मुद्दे पर नेताओं की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस बीजेपी की अंदरूनी राजनीति पर ट्रेन के इंजन और डिब्बों का रूपक इस्तेमाल कर रही है। दोनों बयानों ने मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी को तेज कर दिया है। अब इन मुद्दों पर आने वाली प्रतिक्रियाएं प्रदेश की राजनीतिक बहस को और गर्म कर सकती हैं।
