पश्चिम बंगाल बार काउंसिल की कुल 23 निर्वाचित सीटों के लिए चुनाव हुआ था और बुधवार को इसके नतीजे घोषित किए गए। इस चुनाव में TMC समर्थित उम्मीदवारों ने स्पष्ट बढ़त बनाई। रिपोर्टों के मुताबिक ममता बनर्जी की सिफारिश पर कई TMC उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया था। पार्टी के लीगल सेल से जुड़े कई प्रमुख चेहरे भी चुनाव जीतने में सफल रहे। शुभाशीष चक्रवर्ती सबसे बड़े अंतर से जीत दर्ज करने वाले उम्मीदवारों में रहे। उनके अलावा बैश्वानर चटर्जी अंसार मंडल अशोक देब इंद्रनील बसु और सिद्धार्थ मुखर्जी जैसे TMC समर्थित उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की।
इस चुनाव की एक खास बात महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का परिणाम भी रहा। कुल 23 निर्वाचित सीटों में पांच सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित थीं। इनमें से चार सीटों पर TMC समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की जबकि एक सीट कांग्रेस के खाते में गई। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया दो अतिरिक्त महिला सदस्यों को मनोनीत करेगा। इसके बाद पश्चिम बंगाल बार काउंसिल की कुल सदस्य संख्या 25 हो जाएगी।
बीजेपी के लिए यह परिणाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल की थी। इसके बावजूद बार काउंसिल के चुनाव में बीजेपी अपनी पिछली तीन सीटों की संख्या से आगे नहीं बढ़ सकी। यानी विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन के बावजूद वकीलों की इस प्रतिनिधि संस्था में पार्टी का प्रदर्शन पिछली बार के बराबर रहा। दूसरी ओर TMC ने 15 सीटों के साथ अपना नियंत्रण कायम रखा है। लेफ्ट फ्रंट की सीटें पिछली बार के चार से घटकर तीन हो गईं जबकि कांग्रेस अपनी दो सीटों को बचाने में सफल रही।
इस चुनाव में कुल 75 उम्मीदवार मैदान में थे। TMC ने 23 उम्मीदवार उतारे थे जबकि बीजेपी की ओर से 22 उम्मीदवार चुनाव लड़े। लेफ्ट फ्रंट ने 12 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे और 18 निर्दलीय उम्मीदवार भी मुकाबले में थे। मतदान प्रक्रिया में राज्य के अलग अलग जिला अदालतों से जुड़े वकीलों ने हिस्सा लिया था। अब नतीजे आने के बाद TMC समर्थित खेमे में नए बोर्ड के गठन की तैयारी शुरू होने की उम्मीद है।
राजनीतिक नजरिए से देखें तो बार काउंसिल का चुनाव विधानसभा चुनाव से बिल्कुल अलग प्रकृति का है और इसके नतीजों को सीधे राज्य की राजनीतिक लोकप्रियता का पैमाना नहीं माना जा सकता। फिर भी विधानसभा चुनाव के बाद TMC के लिए यह जीत मनोबल बढ़ाने वाली जरूर है। पार्टी इसे ऐसे समय में हासिल करने में सफल रही है जब उसे चुनावी हार के बाद संगठनात्मक चुनौतियों और अंदरूनी राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। वहीं बीजेपी के लिए यह नतीजा संकेत देता है कि राज्य के कानूनी समुदाय के बीच उसका संगठनात्मक प्रभाव अभी TMC से काफी पीछे है।
