फ्रेम में उतरी झांसी की विरासत, विश्व छायांकन दिवस पर 75 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
झांसी। विश्व छायांकन दिवस 2026 के उपलक्ष्य में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी के ललित कला संस्थान में बुधवार को छायांकन प्रतियोगिता एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में छायांकन कला के प्रति रुचि एवं तकनीकी समझ विकसित करने के साथ-साथ झांसी की ऐतिहासिक धरोहरों, प्राकृतिक परिवेश, स्थानीय संस्कृति और जनजीवन को कैमरे के माध्यम से अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित करना रहा। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए झांसी एवं उसके आसपास के विभिन्न ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण कर अपने कैमरों में विविध दृश्यों को कैद किया।

प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने झांसी की ऐतिहासिक विरासत, स्थापत्य कला, प्राकृतिक वातावरण, स्थानीय जीवनशैली और आसपास के सांस्कृतिक परिवेश को अपनी दृष्टि एवं कलात्मक कौशल के अनुरूप छायांकित किया। विद्यार्थियों द्वारा किए गए छायांकन में विषय चयन, प्रकाश एवं छाया का संतुलन, फ्रेमिंग, कम्पोजिशन तथा दृश्य की संवेदनात्मक अभिव्यक्ति जैसे विभिन्न पक्षों को प्रमुखता दी गई। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को यह अवसर भी प्राप्त हुआ कि वे कक्षा में प्राप्त कलात्मक एवं तकनीकी ज्ञान को वास्तविक परिवेश में प्रयोग करते हुए छायांकन की व्यावहारिक बारीकियों को समझ सकें।
कार्यक्रम के अवसर पर झांसी के वरिष्ठ छायाकार श्री राजीव दुबे एवं वरिष्ठ छायाकार श्री नंदकुमार को छायांकन के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। ललित कला संस्थान की समन्वयक डॉ. श्वेता पाण्डेय ने दोनों वरिष्ठ छायाकारों को शाल, श्रीफल एवं सम्मानपत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ छायाकारों का अनुभव विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है और ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को कला की समृद्ध परंपरा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
इस अवसर पर वरिष्ठ छायाकार श्री नंदकुमार ने छायांकन कला की विशिष्टता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छायांकन एक ऐसी अद्वितीय कला है जिसमें छायाकार को सही क्षण की पहचान के साथ तत्काल निर्णय लेना पड़ता है। उन्होंने कहा कि किसी दृश्य को कैमरे में कैद करने का अवसर कई बार केवल कुछ सेकंड का होता है। यदि उस क्षण को पहचानकर तत्काल क्लिक न किया जाए तो विषय अपने स्वरूप में बदल सकता है और वह महत्वपूर्ण दृश्य दोबारा उसी रूप में उपलब्ध नहीं होता। उन्होंने विद्यार्थियों को छायांकन में तत्परता, धैर्य और एकाग्रता के साथ-साथ कम्पोजिशन की समझ विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि एक अच्छे छायाचित्र में केवल विषय का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि विषय को फ्रेम में किस प्रकार संयोजित किया गया है।
वरिष्ठ छायाकार श्री राजीव दुबे ने विद्यार्थियों को कैमरे की विभिन्न तकनीकों एवं छायांकन की व्यावहारिक बारीकियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फोटोग्राफी केवल किसी दृश्य को कैमरे में दर्ज करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि स्मृतियों को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि एक अच्छा छायाचित्र किसी व्यक्ति, स्थान अथवा घटना से जुड़ी स्मृति को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में सक्षम होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को कैमरे की तकनीकी क्षमताओं को समझने और परिस्थितियों के अनुरूप उनका रचनात्मक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
ललित कला संस्थान की समन्वयक डॉ. श्वेता पाण्डेय ने कहा कि वर्तमान समय में छायांकन कला की जानकारी विद्यार्थियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। कला शिक्षा के क्षेत्र में फोटोग्राफी का महत्व निरंतर बढ़ रहा है और विद्यार्थियों को इसके तकनीकी एवं रचनात्मक दोनों पक्षों की जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में संस्थान के विद्यार्थियों को छायांकन की तकनीकी समझ के साथ विभिन्न फोटोग्राफी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए, ताकि वे अपनी प्रतिभा और कौशल के माध्यम से संस्थान एवं विश्वविद्यालय का नाम गौरवान्वित कर सकें। उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर अभ्यास, अवलोकन और प्रयोग के माध्यम से अपनी छायांकन दृष्टि विकसित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में डॉ. सुनीता, गोविंद यादव, डॉ. अजय कुमार गुप्ता, गजेंद्र सिंह, डॉ. बृजेश कुमार, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. रानी शर्मा एवं डॉ. अंकिता शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने छायांकन के विभिन्न आयामों, तकनीकी पक्षों, विषय चयन, प्रकाश व्यवस्था, कम्पोजिशन तथा रचनात्मक दृष्टिकोण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी विद्यार्थियों के साथ साझा की। उन्होंने कहा कि छायांकन केवल तकनीक आधारित कार्य नहीं है, बल्कि इसमें छायाकार की दृष्टि, संवेदना, कल्पनाशीलता और विषय को देखने का नजरिया भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। छायांकन प्रतियोगिता में 75 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों द्वारा झांसी की धरोहरों, प्राकृतिक दृश्यों एवं स्थानीय सांस्कृतिक परिवेश को कैमरे के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के अंत में प्रतियोगिता एवं आयोजन में सहभागिता करने वाले 75 से अधिक प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए।
आयोजकों के अनुसार विश्व छायांकन दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को छायांकन की तकनीकी समझ प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें अपने आसपास के परिवेश को एक रचनात्मक दृष्टि से देखने के लिए प्रेरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। झांसी की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक विविधता को विद्यार्थियों की दृष्टि से कैमरे में दर्ज करने के इस प्रयास ने कला, तकनीक और स्थानीय विरासत के बीच एक सार्थक संवाद स्थापित किया।
