केन-बेतवा परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में जनजातीय परिवारों के बिना मुआवजे विस्थापन के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों के विरोध में चिता आंदोलन फांसी प्रदर्शन और जल सत्याग्रह जैसे प्रतीकात्मक प्रदर्शन भी किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन प्रदर्शनों में मुआवजे और पुनर्वास को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं वे उपलब्ध सरकारी आंकड़ों से मेल नहीं खाते।
सरकार के अनुसार परियोजना से प्रभावित कुल 5039 परिवारों की पहचान की गई है। इन परिवारों के लिए 629.87 करोड़ रुपए का मुआवजा निर्धारित किया गया है। इसमें से 590.74 करोड़ रुपए यानी करीब 93.78 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जा चुका है। शेष राशि का भुगतान आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद किया जाएगा। सरकार का कहना है कि पात्र परिवारों को किसी तरह का लाभ न छूटे इसके लिए भूमि रिकॉर्ड का लगातार सत्यापन किया जा रहा है।
कृषि भूमि के मुआवजे को लेकर भी सरकार ने आंकड़े जारी किए हैं। जुलाई 2026 तक 10913 प्रभावित लोगों की कृषि भूमि के लिए 360.66 करोड़ रुपए का मुआवजा निर्धारित किया गया था। इसमें से 320.45 करोड़ रुपए यानी 88.85 प्रतिशत राशि वितरित की जा चुकी है। वहीं मकान और दूसरी आवासीय परिसंपत्तियों के लिए 149.63 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं जिसमें से 93.97 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जा चुका है।
सरकार के मुताबिक भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास की प्रक्रिया 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून और मध्य प्रदेश सरकार की ओर से 13 सितंबर 2023 को स्वीकृत विशेष पुनर्वास पैकेज के तहत की जा रही है। अधिगृहीत जमीन के लिए कानून के अनुसार निर्धारित मुआवजा या 12.50 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर में से जो राशि अधिक होगी वह दी जा रही है। इसके अलावा मकान पेड़ कुएं ट्यूबवेल और अन्य अचल संपत्तियों के लिए भी नियमानुसार मुआवजा निर्धारित किया जा रहा है।
पुनर्वास पैकेज में पात्र परिवारों के लिए प्लॉट से जुड़ी सहायता का भी प्रावधान है। ग्रामीण क्षेत्र में प्लॉट के लिए 7 लाख रुपए और शहरी क्षेत्र में प्लॉट के लिए 6.50 लाख रुपए दिए जाने की बात कही गई है। जो परिवार प्लॉट का विकल्प नहीं लेते हैं उन्हें एकमुश्त 12.50 लाख रुपए की सहायता देने का प्रावधान है। अनुसूचित क्षेत्रों में पात्र एससी-एसटी परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता का भी प्रावधान बताया गया है।
प्रभावित परिवारों की समस्याओं को मौके पर सुनने और योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए करौंदिया में विशेष शिविर भी लगाए गए हैं। सरकार के अनुसार इन शिविरों में पशुपालन सामाजिक सुरक्षा गरीबी रेखा लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजनाओं से जुड़े मामलों पर कार्रवाई की गई। स्वास्थ्य सेवाओं के तहत 178 लोगों को उपचार दिया गया और आयुष दवाओं का वितरण भी किया गया। हैंडपंपों की मरम्मत तथा विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति मैपिंग और किताबों के वितरण का काम भी किया गया। सरकार के मुताबिक पिछले दस दिनों में 86 प्रभावित लोगों के लिए 10.42 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है।
विरोध प्रदर्शनों को लेकर सरकार ने एक गंभीर दावा भी किया है। पीआईबी के प्रेस नोट के मुताबिक हाल के आंदोलनों में शामिल कुछ लोगों के नाम परियोजना से प्रभावित परिवारों की सूची भू-अभिलेखों या मुआवजा रजिस्टर में नहीं पाए गए हैं। सरकार ने दावा किया है कि इन प्रदर्शनों में मुख्य रूप से बाहरी तत्व शामिल हैं जो परियोजना को लेकर भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत सूचनाएं फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि आंदोलनकारी पक्ष की ओर से इस दावे पर क्या प्रतिक्रिया आती है यह भी महत्वपूर्ण होगा।
सरकार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के संभावित लाभ भी गिनाए हैं। इसे नेशनल पर्सपेक्टिव प्लान के तहत देश की पहली प्रमुख नदी जोड़ो परियोजना बताया गया है। योजना के तहत केन नदी के अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी की ओर पहुंचाने का प्रस्ताव है ताकि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाई जा सके।
सरकार के मुताबिक परियोजना से करीब 10.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिल सकती है। इसके साथ ही लगभग 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने और 103 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन का लाभ मिलने का दावा किया गया है। परियोजना की अनुमानित लागत 44604.99 करोड़ रुपए बताई गई है।
केन-बेतवा परियोजना को लेकर एक तरफ सरकार मुआवजे और पुनर्वास प्रक्रिया को नियमों के अनुसार पूरा होने का दावा कर रही है तो दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर विरोध और विस्थापन से जुड़े सवाल लगातार उठ रहे हैं। ऐसे में परियोजना से प्रभावित परिवारों की वास्तविक स्थिति और उनकी मांगों पर आगे होने वाली कार्रवाई इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
