उल्लेखनीय है कि मंदिर ट्रस्ट के विशेष अनुरोध पर शासन द्वारा 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम का गठन किया गया था। इस उच्चस्तरीय जांच समिति की अध्यक्षता लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे थे, जबकि आईजी रेंज किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार को इसमें सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। समिति को मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का जिम्मा सौंपा गया था।
जांच टीम ने काफी कम समय में गहन पड़ताल करते हुए 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन के समक्ष प्रस्तुत की थी। प्रारंभिक रिपोर्ट में मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित तत्वों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की स्पष्ट संस्तुति की गई थी। शासन द्वारा इस रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए तत्काल वैधानिक कदम उठाने के निर्देश जारी किए गए थे।
प्रारंभिक रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर 25 जून को राम जन्मभूमि थाने में औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज किया गया था। ट्रस्ट के प्रतिनिधि की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में कई लोगों को नामजद करते हुए अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की सुसंगत धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण पंजीकृत किया गया था।
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस और जांच एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी समेत अन्य आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की थीं। जांच के दौरान वित्तीय लेन-देन, संबंधित दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का बारीक अध्ययन किया गया था, जिसके बाद अब अंतिम रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी गई है।
मध्य प्रदेश सहित देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र राम मंदिर में व्यवस्थाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए ट्रस्ट अब इस अंतिम रिपोर्ट के सुझावों के आधार पर आगामी कदम उठाएगा। शासन से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ट्रस्ट स्तर पर आवश्यक प्रशासनिक सुधारों और कानूनी कदमों को लागू करने की तैयारी की जा रही है।
