आंदोलनकारी छात्रों ने 16 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राहुल गांधी का पुतला जलाने का ऐलान किया है। इसके बाद 20 अगस्त को रांची में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की तैयारी है। छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों पर सरकार को स्पष्ट और प्रभावी कदम उठाना चाहिए।
राहुल गांधी को लेकर छात्रों की नाराजगी की वजह उनके साथ हुई बातचीत के बाद कार्रवाई नहीं होने को बताया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि बातचीत के दौरान उन्हें उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर भरोसा दिया गया था, लेकिन इसके बाद उनकी मांगों पर कोई बड़ा कदम सामने नहीं आया।
छात्रों का कहना है कि अब केवल बातचीत और आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उनका कहना है कि यदि राहुल गांधी वास्तव में उनकी समस्याओं के समर्थन में हैं तो उन्हें आंदोलन के बीच पहुंचकर छात्रों से संवाद करना चाहिए और उनकी मांगों के समाधान के लिए ठोस पहल करनी चाहिए।
आंदोलनकारियों ने कांग्रेस की राजनीतिक भूमिका पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि झारखंड सरकार में कांग्रेस के 16 विधायक हैं। यदि सरकार छात्रों की मांगों को स्वीकार नहीं करती है तो कांग्रेस को अपने समर्थन को लेकर निर्णय लेना चाहिए। छात्रों का तर्क है कि समर्थन वापस लेने से सरकार पर उनकी मांगों को लेकर दबाव बढ़ सकता है।
छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा है कि आंदोलन अब तक शांतिपूर्ण तरीके से चलाया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन का तरीका बदला जा सकता है। इससे आने वाले दिनों में प्रदर्शन के और व्यापक होने की संभावना है।
20 अगस्त को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव को आंदोलन का अहम चरण माना जा रहा है। छात्रों की मुख्य मांग भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर कार्रवाई से जुड़ी है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सरकार पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उनकी शिकायतों पर निर्णय करे और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करे।
इस पूरे घटनाक्रम का असर झारखंड की राजनीति पर भी पड़ सकता है। राज्य विधानसभा में कुल 81 सीटें हैं और बहुमत के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार इंडिया ब्लॉक के पास 56 विधायक हैं। इनमें झारखंड मुक्ति मोर्चा के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल के चार और सीपीआईएमएल के दो विधायक शामिल हैं।
यदि कांग्रेस सरकार से समर्थन वापस लेती है तो झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास 40 विधायक रह जाएंगे, जो बहुमत के आंकड़े से एक कम है। हालांकि, विधानसभा में जेकेएलएम का एक विधायक भी है। उसका समर्थन मिलने पर झारखंड मुक्ति मोर्चा 41 विधायकों के आंकड़े तक पहुंच सकता है। ऐसे में छात्रों का आंदोलन भर्ती परीक्षाओं के मुद्दे से आगे बढ़कर राज्य की राजनीतिक स्थिति को भी प्रभावित करने वाला विषय बनता जा रहा है।
