FDA की इस कार्रवाई का उद्देश्य आयुर्वेदिक दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करना है। जिन कंपनियों को नोटिस जारी किए गए हैं, उन्हें निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों पर स्पष्टीकरण देने और निर्धारित नियमों के अनुपालन की दिशा में आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।
जांच अभियान के दौरान ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 और शेड्यूल टी के तहत निर्धारित प्रावधानों के पालन की जांच की गई। शेड्यूल टी में आयुर्वेदिक, सिद्ध और यूनानी दवाओं के लिए गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस यानी GMP से जुड़े मानक निर्धारित हैं।
निरीक्षण में कुछ इकाइयों में योग्य या स्वीकृत तकनीकी कर्मचारियों की कमी सामने आई। ऐसी स्थिति भी पाई गई जहां आवश्यक तकनीकी स्टाफ की पर्याप्त मौजूदगी के बिना दवा निर्माण किया जा रहा था। कई कंपनियों में गुणवत्ता नियंत्रण विभाग अपेक्षित तरीके से काम नहीं कर रहे थे।
कुछ निर्माण इकाइयों में दवाओं के उत्पादन और परीक्षण के लिए जरूरी मशीनरी तथा उपकरणों की भी कमी पाई गई। इसके अलावा साफ-सफाई से जुड़े मानकों में खामियां, बैच उत्पादन के रिकॉर्ड का अभाव और कच्चे माल से संबंधित दस्तावेजों में अनियमितताएं सामने आईं।
जांच के दौरान कुछ उत्पादों के लेबल पर गलत निर्माण तिथियां दर्ज होने की बात भी सामने आई। कच्चे माल और तैयार उत्पादों की जांच से जुड़े रिकॉर्ड तथा परीक्षण व्यवस्था में भी कमियां पाई गईं। कुछ निर्माताओं के पास कच्चे माल का उचित रिकॉर्ड नहीं था और कुछ निर्माण इकाइयों का लेआउट स्वीकृत व्यवस्था के अनुरूप नहीं पाया गया।
तकनीकी कर्मचारियों और श्रमिकों की मेडिकल जांच से जुड़े रिकॉर्ड का अभाव भी निरीक्षण में सामने आया। इसके अलावा कुछ कंपनियों में कर्मचारियों को दी गई ट्रेनिंग का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। कंट्रोल सैंपल और मास्टर फॉर्मूला रिकॉर्ड जैसे महत्वपूर्ण गुणवत्ता नियंत्रण दस्तावेज भी कुछ इकाइयों में नहीं मिले।
दवा निर्माण के दौरान क्रॉस-कंटामिनेशन रोकने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की कमियां भी सामने आईं। क्रॉस-कंटामिनेशन की स्थिति में एक उत्पाद या कच्चे पदार्थ का दूसरे उत्पाद में अनजाने में मिलना दवा की गुणवत्ता और सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
सबसे गंभीर मामलों में FDA ने 10 आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं के मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिए। इन इकाइयों में ऐसी कमियां पाई गईं जिन्हें दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता के लिए गंभीर माना गया। कार्रवाई का उद्देश्य ऐसी निर्माण प्रक्रियाओं पर रोक लगाना है जिनसे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका हो सकती है।
महाराष्ट्र FDA ने आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं को स्पष्ट किया है कि पारंपरिक आयुर्वेदिक दवाओं का निर्माण मान्यता प्राप्त संदर्भ ग्रंथों और निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए। वहीं पेटेंट और प्रोप्राइटरी आयुर्वेदिक दवाओं के लिए निर्धारित गुणवत्ता नियंत्रण आवश्यकताओं का पालन जरूरी है।
राज्यभर में चलाया गया यह निरीक्षण अभियान आयुर्वेदिक दवा निर्माण क्षेत्र में नियामकीय अनुपालन मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। FDA ने संकेत दिया है कि शेड्यूल टी के GMP मानकों का पालन नहीं करने वाली इकाइयों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इससे निर्माताओं पर गुणवत्ता नियंत्रण, दस्तावेजीकरण, स्वच्छता और सुरक्षित उत्पादन व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
