सरकार के मुताबिक 10000 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली सीएमएएस योजना कंटेनर निर्माण के क्षेत्र में निवेश तकनीकी विकास और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित होगी। इसके तहत अलग अलग आकार के कंटेनर जहाजों के बेड़े के विकास और घरेलू स्तर पर कंटेनरों की खरीद को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। सरकार का अनुमान है कि इससे करीब 99149 करोड़ रुपये के निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। इससे देश में कंटेनर निर्माण के साथ साथ इससे जुड़े सहायक उद्योगों को भी फायदा होगा। कॉर्नर कास्टिंग लकड़ी के फ्रेम और कॉर्टेन स्टील जैसे उत्पाद बनाने वाले उद्योगों में भी मांग बढ़ सकती है।
भारत के लिए इस योजना की जरूरत इसलिए भी अहम है क्योंकि देश हर साल बड़ी संख्या में खाली कंटेनरों का आयात करता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत अपनी जरूरतों और कंटेनरों की पुनःस्थिति के लिए हर साल करीब 20 लाख खाली कंटेनर आयात करता है। घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ने से इस आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत के साथ साथ देश में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और लॉजिस्टिक्स की लागत तथा उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
वैश्विक व्यापार में समुद्री परिवहन की भूमिका को देखते हुए कंटेनर किसी भी देश की सप्लाई चेन का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन के अनुसार दुनिया के कुल माल व्यापार का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा समुद्री मार्ग से होता है। ऐसे में कंटेनरों की पर्याप्त उपलब्धता वैश्विक व्यापार की गति बनाए रखने के लिए जरूरी है। हाल के वर्षों में भू राजनीतिक तनावों के कारण समुद्री मार्गों पर दबाव और माल ढुलाई की लागत में उतार चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे माहौल में भारत का घरेलू कंटेनर निर्माण पर जोर रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार का कहना है कि सीएमएएस भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समुद्री विनिर्माण इकोसिस्टम तैयार करने में मदद करेगी। यह योजना मेक इन इंडिया और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 जैसी पहलों के अनुरूप है। इसके जरिए देश की सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। सरकार पहले ही जहाज निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 70000 करोड़ रुपये के शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस पैकेज की घोषणा कर चुकी है। अब कंटेनर निर्माण को प्रोत्साहन मिलने से भारत के समुद्री विनिर्माण क्षेत्र को और व्यापक आधार मिलने की उम्मीद है। लंबे समय में यह कदम रोजगार बढ़ाने के साथ भारत को समुद्री निर्माण और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
