यह बदलाव ऐसे समय में देखने को मिला है जब स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ रही है। खासकर मेमोरी चिप्स और स्टोरेज से जुड़े कंपोनेंट की कीमतों में बढ़ोतरी ने मोबाइल कंपनियों पर दबाव बढ़ाया है। इसका सबसे ज्यादा असर एंट्री लेवल और मिड रेंज स्मार्टफोन पर दिखाई दे रहा है। इन फोन की कीमत बढ़ने के कारण कुछ ग्राहकों को ऐसा लगने लगा है कि थोड़ी अतिरिक्त रकम खर्च करके प्रीमियम फोन खरीदना ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है। यानी कई मामलों में प्रीमियम फोन की बढ़ती बिक्री केवल ग्राहकों की बढ़ती पसंद का परिणाम नहीं बल्कि पूरे स्मार्टफोन बाजार की बदली हुई कीमतों का असर भी हो सकती है।
पिछले कुछ वर्षों में हाई एंड स्मार्टफोन के लिए ग्राहकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ी थी लेकिन इस साल बाजार की स्थिति थोड़ी अलग नजर आ रही है। मेमोरी और दूसरे कंपोनेंट की बढ़ती लागत ने मिड रेंज फोन की कीमतों पर असर डाला है। जिस स्मार्टफोन की कीमत कुछ समय पहले करीब 40000 रुपये थी उसकी कीमत बढ़कर 50000 रुपये के आसपास पहुंच सकती है। ऐसे में मिड रेंज और प्रीमियम स्मार्टफोन के बीच कीमत का अंतर पहले की तुलना में कम हो जाता है। यही वजह है कि कुछ ग्राहक बजट बढ़ाकर ज्यादा फीचर्स वाले फोन की ओर जा रहे हैं।
प्रीमियम सेगमेंट में Apple और Samsung को इसका सबसे बड़ा फायदा मिलता दिख रहा है। 2026 की पहली तिमाही में प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार में इन दोनों कंपनियों की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 84 प्रतिशत बताई गई है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 82 प्रतिशत था। Apple इस सेगमेंट में मजबूत स्थिति बनाए हुए है जबकि Samsung ने अपनी Galaxy S26 सीरीज के जरिए प्रीमियम बाजार में पकड़ मजबूत की है। दूसरी तरफ Oppo और Vivo भी इस सेगमेंट में तेजी से अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार Oppo की प्रीमियम फोन बिक्री में सालाना आधार पर 69 प्रतिशत जबकि Vivo की बिक्री में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कंपनियां ग्राहकों को महंगे फोन खरीदने के लिए आकर्षित करने के लिए EMI ट्रेड इन बायबैक और दूसरे ऑफर का सहारा भी ले रही हैं। इन विकल्पों की वजह से ग्राहक पूरी कीमत एक साथ चुकाने के बजाय आसान किस्तों में फ्लैगशिप फोन खरीद सकते हैं। Samsung की ओर से कुछ बाजारों में फ्लैगशिप डिवाइस के लिए मासिक भुगतान वाले प्रोग्राम और लंबे EMI विकल्प दिए जा रहे हैं। Apple भी अलग अलग बाजारों में कैशबैक और ट्रेड इन जैसे विकल्पों के जरिए ग्राहकों को आकर्षित कर रही है।
हालांकि आने वाले समय में स्मार्टफोन की कीमतों में बड़ी राहत मिलना आसान नहीं दिख रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक मेमोरी चिप की कीमतों में स्थिरता आने में समय लग सकता है। जब तक कंपोनेंट की लागत सामान्य स्तर पर नहीं आती तब तक स्मार्टफोन की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में भी प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार की मजबूती और मिड रेंज फोन की कीमतों के बीच का अंतर ग्राहकों के खरीदारी फैसले को प्रभावित कर सकता है।
