प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत का मेड-टेक क्षेत्र घरेलू उत्पादन बढ़ने और विभिन्न सरकारी पहलों के कारण लगातार मजबूत हो रहा है। मेडिकल उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी पीएलआई योजना, मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा-मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने वाली योजनाओं पर जोर दिया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य देश में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ तकनीकी विकास और निवेश को गति देना है।
सरकार के अनुसार, पीएलआई योजना के तहत भारत में अब तक 50 से अधिक अत्याधुनिक मेडिकल उपकरणों का निर्माण शुरू हो चुका है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में विदेशी निवेश में भी वृद्धि देखी जा रही है। निवेश बढ़ने को मेडिकल उपकरण निर्माण क्षेत्र में बढ़ते भरोसे के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। घरेलू उत्पादन का विस्तार भारत को चिकित्सा उपकरणों के लिए केवल आयात आधारित बाजार के बजाय एक बड़े विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद कर सकता है।
मेडिकल उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम होने से आपूर्ति शृंखला मजबूत होने और लागत घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसका असर उन्नत डायग्नोस्टिक उपकरणों, इमेजिंग सिस्टम, इम्प्लांट्स और आईसीयू में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है। घरेलू स्तर पर इन उपकरणों का उत्पादन बढ़ने से स्वास्थ्य क्षेत्र में जरूरी तकनीक की पहुंच को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
मेड-टेक क्षेत्र में नई तकनीकों के लिए भी व्यापक संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सॉफ्टवेयर ऐज ए मेडिकल डिवाइस, कनेक्टेड मेडिकल डिवाइस, रोबोटिक्स और रिमोट डायग्नोस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है। इन तकनीकों का इस्तेमाल आने वाले समय में मरीजों की जांच, निगरानी और उपचार की प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, भारत का मेड-टेक बाजार करीब 15 से 16 अरब डॉलर का है और लगभग 12 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। भारत एशिया का चौथा सबसे बड़ा मेडिकल टेक्नोलॉजी बाजार है और वैश्विक स्तर पर शीर्ष 20 बाजारों में शामिल है। बाजार के विस्तार से घरेलू कंपनियों, निवेशकों और तकनीकी क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
सरकार नियामकीय ढांचे, परीक्षण सुविधाओं और क्लीनिकल डेटा से जुड़ी व्यवस्था को भी मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। इसका उद्देश्य मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और भारत में निर्मित मेडिकल उपकरणों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बनाना है। बेहतर परीक्षण और गुणवत्ता व्यवस्था से भारतीय उत्पादों की वैश्विक बाजार में स्वीकार्यता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
मेडिकल डिवाइस उद्योग के मजबूत होने से विनिर्माण और रोजगार के साथ निर्यात तथा तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालिया अनुमान के अनुसार, करीब 14 अरब डॉलर का भारतीय चिकित्सा उपकरण बाजार इस दशक के अंत तक 30 से 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। वर्ष 2047 तक इसके 250 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। ऐसे में घरेलू उत्पादन, अनुसंधान, निवेश और नई तकनीकों का विस्तार भारत को वैश्विक मेड-टेक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में आगे ले जा सकता है।
