10 जून 1973 को रॉयल नेपाल एयरलाइंस का एक विमान बिराटनगर से काठमांडू के लिए रवाना हुआ था। विमान में यात्रियों के साथ अभिनेत्री माला सिन्हा भी मौजूद थीं। उड़ान के दौरान नेपाली कांग्रेस से जुड़े तीन लोगों ने विमान पर कब्जा कर लिया। इनमें दुर्गा प्रसाद सुबेदी के अलावा नागेंद्र धुंगेल और बसंत भट्टराई शामिल थे। अपहरणकर्ताओं ने विमान के पायलट को रास्ता बदलने के लिए मजबूर किया और विमान को भारत के बिहार स्थित फोर्ब्सगंज क्षेत्र में उतार दिया गया।
इस पूरी घटना के पीछे वजह किसी यात्री को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि विमान में ले जाए जा रहे सरकारी धन को हासिल करना बताई जाती है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार विमान में करीब 30 लाख नेपाली रुपये की रकम थी। इस धन को हासिल करने की योजना नेपाल के तत्कालीन राजा महेंद्र की राजशाही के खिलाफ चल रहे सशस्त्र संघर्ष के लिए फंड जुटाने से जुड़ी थी। इस ऑपरेशन के पीछे गिरिजा प्रसाद कोइराला का नाम भी सामने आया था जो बाद में नेपाल के प्रधानमंत्री बने।
विमान को फोर्ब्सगंज में उतारने के बाद अपहरणकर्ताओं ने रकम अपने कब्जे में ली और इसके बाद विमान को यात्रियों के साथ आगे जाने दिया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इस घटना में यात्रियों को नुकसान नहीं पहुंचाया गया था। घटना के बाद यह मामला नेपाल के राजनीतिक इतिहास का बेहद चर्चित अध्याय बन गया।
दुर्गा प्रसाद सुबेदी बाद में नेपाल की राजनीति से जुड़े रहे और उनका नाम इसी ऐतिहासिक विमान अपहरण के कारण लंबे समय तक चर्चा में रहा। उनकी मुलाकात सुशीला कार्की से भारत में पढ़ाई के दौरान हुई थी। कार्की ने आगे चलकर न्यायपालिका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनीं। बाद में वह देश की अंतरिम प्रधानमंत्री भी बनीं।
वहीं माला सिन्हा का फिल्मी सफर बेहद शानदार रहा। उन्होंने हिंदी के साथ बंगाली और नेपाली फिल्मों में भी काम किया और प्यासा धूल का फूल गुमराह अनपढ़ हिमालय की गोद में दिल तेरा दीवाना और आंखें जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से अलग पहचान बनाई। एक तरफ माला सिन्हा का नाम बॉलीवुड के स्वर्णिम दौर से जुड़ा रहा तो दूसरी तरफ 1973 का यह विमान अपहरण उनके जीवन का ऐसा अनोखा प्रसंग बन गया जिसमें बॉलीवुड और नेपाल की राजनीतिक उथल पुथल एक साथ जुड़ गई।
