आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की टीम ने मंगलवार सुबह करीब आठ बजे इंदौर स्थित विभिन्न ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई शुरू की। कई घंटे तक चली तलाशी के दौरान संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बैंक रिकॉर्ड पासपोर्ट और नकदी जब्त की गई। अधिकारियों के मुताबिक जांच अभी जारी है और दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण किया जा रहा है।
जांच में सामने आया कि राकेश गोरखे की नियुक्ति वर्ष 2007 में फार्मासिस्ट के पद पर हुई थी। वर्ष 2015 में उनका मासिक वेतन लगभग 18711 रुपए था जो वर्ष 2025 तक बढ़कर 54664 रुपए हो गया। उनकी पत्नी कीर्ति गोरखे वर्ष 2010 से शासकीय दंत चिकित्सालय में लाइब्रेरियन के पद पर कार्यरत हैं और वर्तमान में उनका मासिक वेतन 42402 रुपए है। दोनों की संयुक्त वैध आय का आकलन करने पर जांच अवधि में कुल आय लगभग 1 करोड़ 11 लाख 31 हजार रुपए पाई गई।
इसके विपरीत जांच एजेंसी को दंपती के पास 2 करोड़ 13 लाख 85 हजार रुपए से अधिक मूल्य की चल और अचल संपत्तियों की जानकारी मिली है। यह उनकी घोषित वैध आय से करीब 108 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है। इसी आधार पर EOW ने आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की है।
तलाशी के दौरान इंदौर के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित छह संपत्तियों का पता चला। इनमें स्कीम नंबर 140 स्थित वृंदावन गार्डन का दो मंजिला मकान साकार एनआरआई सिटी में बड़ा प्लॉट साहिल इंद्रांचल होम्स संघवी रेजीडेंसी और सद्गुरु नंदी विहार में प्लॉट शामिल हैं। इसके अलावा ओमेक्स डेवलपर्स की परियोजना में प्लॉट बुकिंग के लिए लगभग 6 लाख 70 हजार रुपए का भुगतान किए जाने के दस्तावेज भी मिले हैं।
जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है। जब्त किए गए पासपोर्ट से पता चला कि राकेश गोरखे अक्टूबर 2023 में बिना विभागीय अनुमति थाईलैंड की यात्रा पर गए थे। अब EOW इस विदेश यात्रा पर हुए पूरे खर्च का आकलन कर रही है और इसे भी आरोपी के कुल व्यय और संपत्ति के मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा। यदि यात्रा का खर्च वैध आय से मेल नहीं खाता है तो यह जांच को और मजबूत आधार दे सकता है।
कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने करीब 1 लाख 51 हजार रुपए नकद भी बरामद किए हैं। साथ ही कई बैंक पासबुक संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने कई संपत्तियों की जानकारी अपने विभाग को नहीं दी थी जबकि शासकीय कर्मचारियों के लिए ऐसी संपत्तियों की जानकारी विभाग को देना अनिवार्य होता है।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ अब जब्त किए गए सभी दस्तावेजों का सत्यापन कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
