औसत से 16% कम बारिश
पिछले चार दिनों से भारी बारिश नहीं होने के कारण प्रदेश में वर्षा का कुल आंकड़ा सामान्य से पीछे चल रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, अब तक प्रदेश में 404.2 मिमी (15.9 इंच) बारिश दर्ज हुई है, जबकि इस समय तक 482 मिमी (19 इंच) वर्षा होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अब तक करीब 16 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
पूर्वी मध्य प्रदेश में सबसे अधिक कमी
प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश की कमी अधिक दर्ज की गई है। जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में औसतन 20 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इन संभागों का कोई भी जिला सामान्य बारिश के स्तर तक नहीं पहुंच सका है। अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में 1 से 42 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।
पश्चिमी हिस्से में भी सामान्य से कम वर्षा
भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में औसतन 11 प्रतिशत कम बारिश हुई है। आगर-मालवा, अलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, भोपाल, दतिया, धार, गुना, ग्वालियर, हरदा, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में भी सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
इन जिलों में सामान्य से अधिक बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी मध्य प्रदेश के बड़वानी, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, खंडवा और खरगोन ऐसे जिले हैं, जहां अब तक औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई है।
तीन मौसम प्रणालियां सक्रिय, लेकिन असर कमजोर
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्रदेश के ऊपर दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन और एक मानसून ट्रफ सक्रिय हैं, लेकिन इनका प्रभाव फिलहाल मध्य प्रदेश पर नहीं पड़ रहा है। इसी कारण अधिकांश इलाकों में तेज बारिश नहीं हो रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 6 अगस्त से पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के चलते प्रदेश में मानसून दोबारा जोर पकड़ सकता है और कई जिलों में भारी बारिश देखने को मिलेगी।
