पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सूरत निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने 1 अगस्त को भारत निर्वाचन आयोग, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) और महाराष्ट्र सरकार सहित कई सरकारी संस्थाओं को शिकायत भेजी। शिकायत में उन्होंने CJP की फंडिंग के स्रोत, पार्टी की कानूनी स्थिति और संस्थापक अभिजीत दिपके के पिता भगवानराव दिपके की आर्थिक स्थिति की जांच कराने की मांग की। शिकायत में यह भी कहा गया कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
अमित तिवारी ने अपनी शिकायत में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल द्वारा घोषित एक करोड़ रुपये के लीगल डिफेंस फंड का भी उल्लेख किया। उन्होंने मांग की कि इस फंड पर लागू कर नियमों की समीक्षा की जाए और आवश्यकता होने पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाए जाने के पहलू की भी जांच की जाए। शिकायत में विभिन्न सरकारी एजेंसियों से पूरे मामले की विस्तृत पड़ताल करने का अनुरोध किया गया है।
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए CJP की प्रवक्ता वैष्णवी गौर ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी निजी व्यक्ति की शिक्षा, पारिवारिक खर्च या व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति को राजनीतिक विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है। उनके अनुसार इस तरह की शिकायतें तथ्यों से अधिक राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित दिखाई देती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना ही उद्देश्य है तो सभी संस्थाओं और फंडों पर समान मानदंड लागू होने चाहिए।
पार्टी ने अपने आधिकारिक रुख में कहा कि उसकी फंडिंग और कानूनी स्थिति को लेकर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं और उन्हें राजनीतिक एजेंडे के तहत उछाला जा रहा है। CJP का कहना है कि वह कानून के दायरे में काम कर रही है और यदि किसी सक्षम एजेंसी द्वारा कोई वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाती है तो पार्टी पूरा सहयोग करेगी। साथ ही पार्टी ने आरोप लगाया कि चुनिंदा संगठनों और व्यक्तियों को निशाना बनाकर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल इस पूरे मामले में भारत निर्वाचन आयोग, सीबीआईसी, महाराष्ट्र सरकार या अन्य संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिकायतों पर जांच शुरू हुई है या नहीं, इस संबंध में भी अभी तक कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में अब निगाहें संबंधित एजेंसियों के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि मामले में किसी प्रकार की जांच शुरू होती है तो उसके निष्कर्षों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह विवाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के रूप में चर्चा का विषय बना हुआ है।
