कटनी के कुठला क्षेत्र में अपने शिष्यों द्वारा निर्मित ‘बागेश्वर बालाजी’ मठ के कार्यक्रम में पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री ने युवाओं से भारतीय संस्कृति और मर्यादा के अनुरूप संवाद करने की अपील की। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में समसामयिक मुद्दों पर भी अपने विचार रखे।
‘विरोध हो, लेकिन मर्यादा के साथ’
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी के परिवार या मां-बहन के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग भारतीय संस्कृति और सभ्यता के अनुरूप नहीं है। उनका कहना था कि असहमति व्यक्त करते समय भी भाषा और व्यवहार की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है।
युवाओं से संवाद का रास्ता अपनाने की अपील
उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। ऐसे में युवाओं को विवाद और कटुता के बजाय संवाद, शांति और संयम का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी बात प्रेमपूर्ण और शालीन भाषा में रखें।
सावन और कांवड़ यात्रा पर भी दी सलाह
धीरेंद्र शास्त्री ने सावन माह और कांवड़ यात्रा का उल्लेख करते हुए श्रद्धालुओं से भगवान शिव की भक्ति पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के नाम पर ऐसा कोई कार्य नहीं होना चाहिए जिससे किसी की भावनाएं आहत हों या समाज में विवाद की स्थिति पैदा हो।
संयम और संस्कार पर दिया जोर
उन्होंने कांवड़ यात्रियों से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि आचरण ऐसा होना चाहिए जिससे धर्म और समाज की गरिमा बनी रहे। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी संस्कृति, संस्कार, आपसी प्रेम और सामाजिक सद्भाव में निहित है, जिसे हर हाल में सुरक्षित रखना चाहिए।
