फिल्म लाड़ला में आखिरकार श्रीदेवी अनिल कपूर और रवीना टंडन मुख्य भूमिकाओं में नजर आए लेकिन शुरुआत में श्रीदेवी इस फिल्म का हिस्सा नहीं थीं। निर्माता और निर्देशक ने इस किरदार के लिए दिव्या भारती को चुना था। दिव्या उस समय बॉलीवुड की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शुमार थीं और लगातार सुपरहिट फिल्में दे रही थीं। उनके साथ फिल्म की लगभग 90 से 95 प्रतिशत शूटिंग पूरी भी हो चुकी थी।
फिल्म के लेखक अनीस बज्मी ने हाल ही में एक बातचीत में उस दौर की यादें साझा करते हुए बताया कि पूरी यूनिट दिव्या भारती के निधन से गहरे सदमे में थी। उन्होंने कहा कि फिल्म लगभग पूरी हो चुकी थी और सिर्फ क्लाइमेक्स सहित कुछ हिस्सों की शूटिंग बाकी थी। लेकिन अचानक दिव्या की मौत ने सब कुछ बदल दिया। पूरी टीम को समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या किया जाए। हादसे के बाद करीब दो महीने तक फिल्म पर कोई काम नहीं हुआ क्योंकि सभी लोग मानसिक रूप से टूट चुके थे।
अनीस बज्मी ने बताया कि आखिरकार निर्माताओं ने फैसला किया कि फिल्म को नए सिरे से शूट किया जाएगा। इसके बाद श्रीदेवी को इस भूमिका के लिए चुना गया। श्रीदेवी ने फिल्म में शानदार अभिनय किया और पूरी फिल्म दोबारा शूट की गई। यह निर्णय आसान नहीं था क्योंकि पहले से शूट हो चुका अधिकांश हिस्सा दोबारा फिल्माना पड़ा जिससे समय और लागत दोनों में भारी बढ़ोतरी हुई।
अनीस बज्मी ने दिव्या भारती के आखिरी शूट का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि चेन्नई में फिल्म की शूटिंग चल रही थी और दिव्या ने अपनी मौत से एक दिन पहले एक भावनात्मक दृश्य फिल्माया था। उस दृश्य में उनका किरदार कैमरे से दूर जाता है और एक नकाबपोश व्यक्ति उन्हें खींचकर ले जाता है। उस दौरान उनका आखिरी संवाद था मुझे बचाओ। अगले ही दिन दिव्या भारती के निधन की खबर ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को स्तब्ध कर दिया।
दिलचस्प बात यह है कि केवल लाड़ला ही नहीं बल्कि फिल्म अंगरक्षक भी दिव्या भारती की मौत के बाद दोबारा शूट करनी पड़ी थी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनके असमय निधन ने बॉलीवुड की कई बड़ी फिल्मों और निर्माताओं को कितना प्रभावित किया था।
सभी मुश्किलों के बावजूद लाड़ला 1994 में रिलीज हुई और दर्शकों ने इसे भरपूर प्यार दिया। श्रीदेवी और अनिल कपूर की जोड़ी को खूब सराहा गया जबकि फिल्म के संवाद गीत और दमदार कहानी ने इसे बड़ी सफलता दिलाई। आज भी लाड़ला सिर्फ एक सफल फिल्म नहीं बल्कि बॉलीवुड के सबसे भावुक और यादगार फिल्मी सफरों में से एक मानी जाती है जहां एक दर्दनाक हादसे के बाद भी पूरी टीम ने हिम्मत नहीं हारी और एक यादगार फिल्म दर्शकों तक पहुंचाई।
