स्कॉट्सटाउन स्टेडियम में आयोजित 5000 मीटर फाइनल बेहद रोमांचक रहा। शुरुआत में गुलवीर आठवें स्थान पर चल रहे थे लेकिन उन्होंने शानदार रणनीति और धैर्य का परिचय देते हुए धीरे धीरे अपनी रफ्तार बढ़ाई। शुरुआती 400 मीटर उन्होंने 1 मिनट 10.6 सेकंड में पूरे किए। इसके बाद अगले चरण में उन्होंने तेजी दिखाई और चौथे स्थान तक पहुंच गए। लगातार शानदार लय बनाए रखते हुए उन्होंने 3000 मीटर की दूरी 8 मिनट 16.6 सेकंड में पूरी की और अंतिम चरण में जबरदस्त स्प्रिंट लगाकर तीसरे स्थान पर कब्जा जमा लिया।
गुलवीर सिंह ने 13 मिनट 24.95 सेकंड का समय निकालते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। केन्या के मैथ्यू किपचुम्बा किपसांग ने 13 मिनट 23.61 सेकंड के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि ऑस्ट्रेलिया के काय रॉबिन्सन ने 13 मिनट 24.70 सेकंड का समय निकालकर रजत पदक हासिल किया। अंतिम 200 मीटर में गुलवीर ने जिस संयम और गति का प्रदर्शन किया उसने उन्हें पोडियम तक पहुंचा दिया।
इससे पहले 10000 मीटर दौड़ में भी गुलवीर सिंह ने 27 मिनट 49.78 सेकंड का समय निकालते हुए रजत पदक जीता था। उस प्रदर्शन ने ही संकेत दे दिया था कि भारतीय धावक इस बार इतिहास रचने के इरादे से मैदान में उतरे हैं। 5000 मीटर में कांस्य जीतने के साथ उन्होंने अपनी शानदार फिटनेस और निरंतरता का भी परिचय दिया।
उत्तर प्रदेश के अतरौली के रहने वाले 28 वर्षीय गुलवीर सिंह भारतीय सेना में कार्यरत हैं। सीमित संसाधनों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाले गुलवीर की सफलता युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है। कठिन मेहनत अनुशासन और लगातार अभ्यास की बदौलत उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन लगातार मजबूत होता जा रहा है। अब तक भारतीय दल 39 पदक जीत चुका है जिनमें 13 स्वर्ण 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल हैं। पदक तालिका में भारत चौथे स्थान पर बना हुआ है और आने वाले मुकाबलों में देश को खिलाड़ियों से और भी शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है।
गुलवीर सिंह की ऐतिहासिक उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए नई उम्मीद और नई दिशा का प्रतीक है। यह जीत बताती है कि भारत अब लंबी दूरी की दौड़ में भी दुनिया की बड़ी ताकतों को चुनौती देने की क्षमता रखता है। आने वाले वर्षों में गुलवीर जैसे खिलाड़ी देश को वैश्विक प्रतियोगिताओं में और भी बड़ी सफलताएं दिलाने का दम रखते हैं।
