बीते दो दिनों में सक्रिय रहे तीन मजबूत मौसम प्रणालियों के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई। सबसे ज्यादा असर पश्चिमी मध्य प्रदेश में देखने को मिला। खरगोन जिले में पिछले 24 घंटे के दौरान करीब 2.2 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। झिरनिया में सबसे ज्यादा 3.8 इंच वर्षा हुई जबकि गोगांवा में 3.5 इंच कसरावद में 3.1 इंच महेश्वर में 2.6 इंच और सेगांव में करीब 1.9 इंच बारिश दर्ज की गई। भीकनगांव सनावद बड़वाह और खरगोन शहर में भी अच्छी बारिश हुई जिससे नदियों और जलप्रपातों का जलस्तर बढ़ गया। लगातार दो दिन हुई तेज बारिश के कारण प्रसिद्ध कुंदा जलप्रपात उफान पर पहुंच गया और सुरक्षा को देखते हुए सिरवेल महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही पर रोक लगा दी गई।
रतलाम जिले में भी शनिवार सुबह से रुक रुककर बारिश जारी रही। जिले में अब तक 13 इंच से अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है जिससे शहर का हनुमान ताल पूरी तरह भर गया और जुलाई महीने का वर्षा लक्ष्य भी पूरा हो गया। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अब तक लगभग 9 इंच कम बारिश हुई है। पिछले साल इसी अवधि तक जिले में करीब 22 इंच पानी गिर चुका था जबकि इस बार आंकड़ा 13 इंच के आसपास ही है।
भोपाल मंदसौर सहित कई जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश का दौर बना रहा। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल सक्रिय मौसम प्रणालियां कमजोर पड़ रही हैं इसलिए अगले चार दिनों तक भारी बारिश की संभावना कम रहेगी। हालांकि यदि बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में नया सिस्टम विकसित होता है तो मौसम अचानक बदल सकता है और कुछ इलाकों में फिर से भारी वर्षा देखने को मिल सकती है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 15.4 इंच यानी 390.3 मिलीमीटर बारिश हुई है जबकि सामान्य स्थिति में इस समय तक 17.6 इंच वर्षा होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में करीब 2.3 इंच यानी 13 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में वर्षा की कमी 15 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 11 प्रतिशत दर्ज की गई है।
स्थिति यह है कि अनूपपुर बालाघाट छतरपुर जबलपुर सागर सतना भोपाल ग्वालियर उज्जैन विदिशा रतलाम मंदसौर रायसेन शिवपुरी सहित कुल 42 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। वहीं मऊगंज उमरिया शहडोल खंडवा बड़वानी खरगोन इंदौर देवास राजगढ़ सीहोर सहित 13 जिलों में औसत से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अगस्त का महीना प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। यदि मानसून सक्रिय बना रहा और लगातार अच्छे सिस्टम बनते रहे तो न केवल बारिश की मौजूदा कमी पूरी हो सकती है बल्कि खरीफ फसलों को भी बड़ा फायदा मिलेगा। फिलहाल किसानों और आम लोगों की निगाहें अगस्त की बारिश पर टिकी हुई हैं।
