प्रतियोगिता की शुरुआत नीरज चोपड़ा ने 80.97 मीटर के थ्रो से की लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने 85.83 मीटर की दूरी तय कर मुकाबले में मजबूत दावेदारी पेश कर दी। इसके बाद भी उन्होंने लगातार स्थिर प्रदर्शन करते हुए 81.29 मीटर और 80.73 मीटर के थ्रो किए। हालांकि श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिराज ने 89.75 मीटर का शानदार थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया और नीरज को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। इसके बावजूद नीरज का यह प्रदर्शन उनके मौजूदा सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा जिसने आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए उनके आत्मविश्वास को नई मजबूती दी।
दूसरी ओर यशवीर सिंह ने शानदार संघर्ष का परिचय दिया। शुरुआती प्रयासों में वह पदक की दौड़ से कुछ पीछे दिखाई दे रहे थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में 78.55 मीटर और तीसरे प्रयास में 81.33 मीटर का थ्रो करने के बाद उन्होंने अंतिम प्रयास में 85.41 मीटर की दूरी तय कर मुकाबले का रुख बदल दिया। यह उनके करियर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा और इसी के दम पर उन्होंने कांस्य पदक जीतकर भारत को दोहरी खुशी दी। यशवीर का यह प्रदर्शन भारतीय जैवलिन थ्रो की नई पीढ़ी की क्षमता को भी साबित करता है।
भारत के एक अन्य खिलाड़ी रोहित यादव भी फाइनल में उतरे और उन्होंने 81.56 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए सातवां स्थान हासिल किया। हालांकि वह पदक नहीं जीत सके लेकिन उनका प्रदर्शन भी संतोषजनक माना गया।
इन दो पदकों के साथ भारत का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कुल पदकों का आंकड़ा 23 तक पहुंच गया है। देश के खाते में अब 5 स्वर्ण 12 रजत और 6 कांस्य पदक दर्ज हो चुके हैं। एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में भारत ने अब तक 11 पदक जीत लिए हैं जबकि वेटलिफ्टिंग में 8 पदक जूडो में 3 पदक और पैरा पावरलिफ्टिंग में 1 कांस्य पदक हासिल हुआ है।
पदक तालिका में भारत फिलहाल दसवें स्थान पर बना हुआ है जबकि ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर कायम है। इंग्लैंड दूसरे और कनाडा तीसरे स्थान पर है। भारतीय खिलाड़ियों का लगातार बेहतर प्रदर्शन यह संकेत दे रहा है कि आने वाले मुकाबलों में पदकों की संख्या और बढ़ सकती है। नीरज चोपड़ा और यशवीर सिंह की यह उपलब्धि न केवल भारतीय खेल इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ती है बल्कि युवा खिलाड़ियों को भी बड़े मंच पर बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देती है।
