संन्यास की घोषणा करते हुए रहाणे ने लिखा कि कैप नंबर 278 अब यहीं तक है। उन्होंने अपने प्रशंसकों, साथियों और भारतीय क्रिकेट से जुड़े हर व्यक्ति का आभार जताते हुए कहा कि हर शुरुआत का एक अंत होता है और उन्हें लगता है कि अब आगे बढ़ने का यही सही समय है। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजी में हमेशा सही टाइमिंग पर भरोसा किया और अब संन्यास लेने के लिए भी यही सही समय है।
मुंबई के डोंबिवली से निकलकर भारतीय टीम तक का सफर तय करने वाले रहाणे ने कहा कि उनका बचपन सिर्फ एक सपना लेकर बीता कि एक दिन भारत की जर्सी पहनकर देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने हमेशा देश और टीम को खुद से ऊपर रखा और पूरी ईमानदारी के साथ क्रिकेट खेला। उनका मानना रहा कि अगर नीयत साफ हो तो खेल हमेशा आपका साथ देता है।
रहाणे के करियर का सबसे स्वर्णिम अध्याय 2020-21 का ऑस्ट्रेलिया दौरा माना जाता है। एडिलेड टेस्ट में भारत के 36 रन पर ऑलआउट होने और विराट कोहली के स्वदेश लौटने के बाद टीम पूरी तरह दबाव में थी। ऐसे मुश्किल समय में रहाणे ने कप्तानी संभाली और मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर शानदार शतक लगाकर टीम में नया आत्मविश्वास भरा। उनकी कप्तानी में युवा और चोटों से जूझ रही भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में 2-1 से हराकर इतिहास रच दिया। यही वजह है कि उन्हें आज भी मेलबर्न का हीरो कहा जाता है।
रहाणे लंबे समय तक विदेशी परिस्थितियों में भारत के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज रहे। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी-20 मुकाबले खेले। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 5077 रन, 12 शतक और 26 अर्धशतक दर्ज हैं। वनडे में उन्होंने 2962 रन बनाए, जिसमें तीन शतक और 24 अर्धशतक शामिल रहे। टी-20 अंतरराष्ट्रीय में उन्होंने 375 रन बनाए। तीनों प्रारूपों को मिलाकर रहाणे ने भारत के लिए 8414 अंतरराष्ट्रीय रन बनाए और 15 शतक जड़े।
वह 2015 विश्व कप में सेमीफाइनल तक पहुंचने वाली भारतीय टीम का अहम हिस्सा रहे। इसके अलावा 2023 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप चक्र में भी उन्होंने भारत के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। हालांकि जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ आखिरी टेस्ट खेलने के बाद उन्हें टीम में दोबारा मौका नहीं मिला। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर वापसी की कोशिश की, लेकिन राष्ट्रीय टीम में वापसी का सपना पूरा नहीं हो सका।
अपने विदाई संदेश में रहाणे ने कहा कि क्रिकेट ने उन्हें जीत भी दिखाई और हार भी, लेकिन एक जगह वह कभी नहीं हारे और वह था लोगों का प्यार। उन्होंने कहा कि अब वह अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों को अपने अनुभव और खेल से सीखे गए मूल्यों को देना चाहते हैं ताकि भारतीय क्रिकेट आगे भी नई ऊंचाइयों को छूता रहे।
अजिंक्य रहाणे भले ही मैदान पर अब बल्लेबाजी करते नजर नहीं आएंगे, लेकिन उनकी शांत कप्तानी, कठिन परिस्थितियों में जिम्मेदारी निभाने का जज्बा और मेलबर्न में खेली गई ऐतिहासिक पारी भारतीय क्रिकेट इतिहास में हमेशा सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेगी।
