शिकायत में कहा गया है कि शहर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों और सीएम राइज स्कूलों में पदस्थ कुछ शिक्षक नियमित शिक्षण कार्य के साथ निजी कोचिंग सेंटर भी संचालित कर रहे हैं। शिकायत में एल.डी. शर्मा, प्रदीप झा, कल्पना धाकड़, केशव शर्मा, देवेंद्र धाकड़, मनीष शर्मा, कृष्णकांत राठौर, विपिन पचौरी, गोविंद धाकड़, दीप ओझा और ददीवाल सर के नाम शामिल किए गए हैं।
शिकायतकर्ता नीरज वर्मा का आरोप है कि संबंधित शिक्षक विद्यालय में पूरा पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाते, जिससे छात्र निजी कोचिंग लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि जो छात्र कोचिंग में प्रवेश नहीं लेते या फीस जमा नहीं करते, उन्हें प्रैक्टिकल परीक्षा में कम अंक देने और वार्षिक परीक्षा में असफल करने की धमकी दी जाती है। वर्मा का कहना है कि उनके पास इन आरोपों से जुड़े वीडियो और अन्य साक्ष्य भी मौजूद हैं, जिन्हें जांच के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी आकाश सिंह यादव ने जिले के सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ), बीआरसीसी और संकुल प्राचार्यों को निर्देश जारी किए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत कोई भी शासकीय शिक्षक नियमों के विरुद्ध निजी ट्यूशन या अन्य व्यावसायिक गतिविधि में शामिल नहीं हो सकता।
डीईओ ने निर्देश दिए हैं कि यदि कोई शिक्षक निजी कोचिंग संचालित करते हुए या किसी प्रतिबंधित व्यावसायिक गतिविधि में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सेवा नियमों के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
हालांकि फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। शिक्षा विभाग का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
