नई दिल्ली । फिल्म उद्योग में कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि कोई फिल्म सिनेमाघरों में दर्शकों का अपेक्षित समर्थन नहीं जुटा पाती, लेकिन बाद में किसी दूसरे मंच पर उसे नई पहचान मिल जाती है। तेलुगु फिल्म ‘जया जानकी नायक’ इसका एक प्रमुख उदाहरण बनकर सामने आई है। वर्ष 2017 में रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकी थी, लेकिन कुछ वर्षों बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इसने ऐसी उपलब्धि हासिल की, जिसने इसे भारतीय सिनेमा की चर्चित फिल्मों की सूची में शामिल कर दिया।
निर्देशक बोयापति श्रीनु के निर्देशन में बनी इस फिल्म में बेलमकोंडा श्रीनिवास और रकुल प्रीत सिंह मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म का निर्माण लगभग 40 करोड़ रुपये के बजट में किया गया था। हालांकि रिलीज के बाद यह दर्शकों को सिनेमाघरों तक आकर्षित करने में सफल नहीं रही और इसकी कमाई करीब 20 करोड़ रुपये तक ही सीमित रही। लागत की तुलना में कम कारोबार होने के कारण इसे बॉक्स ऑफिस पर असफल फिल्मों में गिना गया।
फिल्म के कमजोर प्रदर्शन के बावजूद निर्माताओं ने इसके प्रति उम्मीद नहीं छोड़ी। उन्होंने बदलते डिजिटल दौर को देखते हुए फिल्म को नए दर्शकों तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई। इसके तहत वर्ष 2019 में फिल्म का हिंदी डब संस्करण तैयार किया गया और इसका नाम बदलकर ‘खूंखार’ रखा गया। इसके बाद इसे YouTube पर रिलीज किया गया, जहां फिल्म को अप्रत्याशित रूप से बड़ी संख्या में दर्शकों का समर्थन मिलने लगा।
हिंदी भाषा में उपलब्ध होने के कारण फिल्म देशभर के उन दर्शकों तक भी पहुंची, जो पहले इसे नहीं देख पाए थे। एक्शन, पारिवारिक भावनाओं और व्यावसायिक मनोरंजन से भरपूर कहानी ने डिजिटल दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। धीरे-धीरे फिल्म के व्यूज लगातार बढ़ते गए और समय के साथ इसने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली।
फिल्म का हिंदी संस्करण YouTube पर 100 करोड़ यानी एक बिलियन से अधिक व्यूज का आंकड़ा पार करने में सफल रहा। इस उपलब्धि के साथ यह 100 करोड़ व्यूज हासिल करने वाली पहली भारतीय फीचर फिल्म बन गई। जिस फिल्म को कभी बॉक्स ऑफिस पर असफल माना गया था, वही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली भारतीय फिल्मों में शामिल हो गई।
यह उदाहरण इस बात को भी दर्शाता है कि किसी फिल्म की सफलता अब केवल थिएटर कलेक्शन तक सीमित नहीं रह गई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने फिल्मों के लिए नए अवसर तैयार किए हैं, जहां भाषा की बाधाएं भी काफी हद तक समाप्त हो चुकी हैं। हिंदी डब संस्करणों की बढ़ती लोकप्रियता ने दक्षिण भारतीय फिल्मों को देशभर में नई पहचान दिलाई है और दर्शकों का दायरा पहले से कहीं अधिक विस्तृत हुआ है।
‘जया जानकी नायक’ की यह यात्रा फिल्म उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह साबित करती है कि यदि किसी फिल्म की सामग्री दर्शकों को पसंद आती है तो वह समय के साथ नए मंचों पर भी सफलता हासिल कर सकती है। डिजिटल माध्यमों ने फिल्मों को दूसरा अवसर दिया है और कई ऐसी फिल्मों को नई पहचान मिली है, जिन्हें सिनेमाघरों में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई थी।
