नई दिल्ली । कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने चुनावी राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया है कि वह वर्ष 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने एक विस्तृत संदेश जारी कर अपने फैसले की जानकारी दी और कहा कि बढ़ती उम्र, स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियां तथा राजनीति में बढ़ते भ्रष्टाचार ने उन्हें यह निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव नहीं लड़ने के बावजूद वह सार्वजनिक जीवन और राजनीति में सक्रिय बने रहेंगे।
सिद्धारमैया ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक माहौल पहले की तुलना में काफी बदल चुका है। उनके अनुसार, आज राजनीति में ईमानदारी और सिद्धांतों के साथ काम करना पहले से अधिक कठिन हो गया है। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया में धनबल का प्रभाव बढ़ा है और अब चुनाव लड़ने के लिए परिस्थितियां पहले जैसी नहीं रहीं। उन्होंने कहा कि इसी बदलते माहौल को देखते हुए उन्होंने भविष्य में किसी भी चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनने का फैसला किया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी उम्र अब 79 वर्ष हो चुकी है और वर्तमान सरकार का कार्यकाल समाप्त होने तक उनकी आयु 81 से 82 वर्ष के बीच होगी। उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर भी प्रभाव पड़ता है। पहले जैसी ऊर्जा और निरंतर सक्रियता बनाए रखना अब संभव नहीं है, इसलिए उन्होंने समय रहते चुनावी राजनीति से अलग होने का निर्णय लिया है।
उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सार्वजनिक यात्रा वर्ष 1978 में तालुक बोर्ड सदस्य के रूप में शुरू हुई थी। पिछले लगभग पांच दशकों में उन्होंने जीत और हार दोनों का अनुभव किया, लेकिन हमेशा अपने सिद्धांतों और वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ काम करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कभी व्यक्तिगत लाभ के लिए अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया और यही उनके सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
सिद्धारमैया ने यह भी बताया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र वरुणा के लोग लगातार उनसे अगला चुनाव लड़ने का आग्रह कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपना निर्णय नहीं बदलने की बात कही। उनका कहना है कि वह जनता की भावनाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन अब चुनावी राजनीति से पीछे हटना ही उचित मानते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनता की समस्याओं और सामाजिक मुद्दों को उठाने का उनका प्रयास आगे भी जारी रहेगा।
उन्होंने अपने संदेश में राजनीति में बढ़ते आर्थिक प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि पहले चुनाव जनता के सहयोग और जनसमर्थन के बल पर लड़े जाते थे, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उनके अनुसार, स्वस्थ लोकतंत्र के लिए पारदर्शिता, नैतिकता और जनविश्वास आवश्यक हैं तथा इन मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता है।
सिद्धारमैया के इस ऐलान को कर्नाटक की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। लंबे समय तक राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने वाले इस वरिष्ठ नेता के फैसले के बाद भविष्य में कांग्रेस की चुनावी रणनीति और नेतृत्व को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज होने की संभावना है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि चुनाव नहीं लड़ने के बावजूद वह संगठन और जनता के बीच सक्रिय रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे।
