हरदोई। 17 जुलाई की रात… घर के लोग गहरी नींद (Deep sleep) में सो रहे थे. अलमारी की चाबी तकिए के नीचे रखी थी. घर के अंदर आने-जाने वाले लोगों को सब पता था. कुछ घंटों बाद अलमारी खाली थी और नोटों से भरे 8 बैग गायब. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के हरदोई (Hardoi) में हुई करोड़ों की इस चोरी ने पुलिस के भी होश उड़ा दिए थे. लेकिन अब पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल चोरी (High-profile theft) की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है।
हरदोई पुलिस ने दो बाल अपचारियों समेत 16 लोगों को पकड़ लिया है और उनके कब्जे से करीब 1 करोड़ 29 लाख रुपये की नकदी बरामद की है. पुलिस का कहना है कि अभी कुछ आरोपी फरार हैं. यह वारदात शहर कोतवाली के रेलवेगंज इलाके में रहने वाले थोक परचून कारोबारी पंकज अग्रवाल के घर हुई थी. शुरुआत में शक घर में काम करने वाले तीन नौकरों पर गया और पुलिस की जांच भी वहीं से शुरू हुई।
जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि घर में काम करने वाले दो नाबालिग नौकर और एक कर्मचारी शोभित ही पूरी साजिश की पहली कड़ी थे. उन्हें मालूम था कि घर में कितनी नकदी रहती है, अलमारी की चाबी कहां रखी जाती है और परिवार की दिनचर्या क्या है. यही जानकारी उन्होंने बाहर बैठे अपने साथियों तक पहुंचाई।
पुलिस के मुताबिक, प्लानिंग के तहत परिवार के खाने में कथित तौर पर नींद की गोलियां मिला दी गईं. जब पूरा परिवार गहरी नींद में सो गया तो आरोपी छत के रास्ते घर में दाखिल हुए. पंकज अग्रवाल के कमरे में जाकर तकिए के नीचे रखी अलमारी की चाबी निकाली गई, अलमारी खोली गई और नोटों से भरे आठ बैग बाहर खड़े वाहन में लाद दिए गए. कुछ ही मिनटों में करोड़ों रुपये लेकर पूरा गिरोह फरार हो गया।
चोरी के बाद कैसे खुलती गईं परतें?
पुलिस ने एसओजी, स्वाट और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर जांच शुरू की. सर्विलांस और पूछताछ के दौरान एक-एक कर आरोपियों की कड़ियां जुड़ती चली गईं. जांच में सामने आया कि चोरी की रकम इतनी ज्यादा थी कि उसे छिपाने के लिए कई और लोगों को भी शामिल किया गया।
पुलिस ने अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि दो बाल अपचारियों को हिरासत में लिया. इनके पास से 1 करोड़ 28 लाख 99 हजार 310 रुपये बरामद किए गए. पुलिस का कहना है कि गिरोह के कुछ सदस्य अभी भी फरार हैं. उनकी तलाश जारी है और उम्मीद है कि पूछताछ के बाद बाकी नकदी भी बरामद हो सकती है।
इस पूरे मामले में एक और पहलू चर्चा में है. जिस घर से इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिली, उसने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि डिजिटल लेनदेन के दौर में आखिर इतना कैश घर में क्यों रखा गया था? इतनी बड़ी नकदी सामने आने के बाद अब आयकर विभाग और जीएसटी विभाग की नजर भी इस मामले पर टिक सकती है।
व्यापारी ने केस दर्ज कराते समय चोरी की रकम नहीं दर्ज कराई थी. बाद में पुलिस की जांच में पूरी कहानी सामने गई गई. पुलिस का कहना है कि घर में काम करने वाले दो नाबालिग और शोभित को यह जानकारी थी कि घर में कितना पैसा रहता है. चाबी कहां रखी जाती है, जबकि टडियांवा थाने के बेलाहा गांव का रहने वाला अजय शुक्ला, शिवम और बदन जो शहर कोतवाली का रहने वाले है और उसी इलाके में मजदूरी करते हैं. इन लोगों ने घर में चोरी की प्लानिंग की और घरेलू नौकरों से दोस्ती कर पूरी रेकी कराई।
घरेलू नौकरों ने खाने में कथित तौर पर नींद की गोलियां मिलाईं. जब पूरा परिवार सो गया तो अजय शुक्ला और बदन तीनों नौकरों के साथ मकान में दाखिल हुआ. शिवम् बाहर खड़ा रहा. इसके बाद नोटों से भरे बैग वाहन में लादे और फरार हो गए. रकम छिपाने और ठिकाने लगाने के लिए गैंग ने कई अन्य लोगों को भी शामिल कर लिया. इनमें लखनऊ के मड़ियावा का दीपक साहू, सनी गुप्ता, अमान, हरदोई जिले के परम किशोर, केशव, शिवम, सनी बाल्मीकि, नीरज, प्रिंस और महफूज को कैश दे दिया था।
एएसपी पूर्वी हरदोई सुबोध गौतम ने कहा कि 16-17 जुलाई की रात को रेलवेगंज के व्यवसायी पंकज अग्रवाल के घर में चोरी हुई थी. उन्होंने नामजद तहरीर दी कि उनके तीन नौकरों ने अलमारी में रखे पैसों के बैग चोरी कर लिए हैं. इस मामले की तफ्तीश करते हुए पुलिस ने लगभग 1 करोड़ 29 लाख रुपये बरामद किए हैं. 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. दो बाल अपचारी हिरासत में हैं. कुछ आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
