जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन तथा उससे संकटग्रस्त जलीय वन्यजीवों और पर्यावरण पर पड़ रहे प्रभाव से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में अवैध रेत खनन में सहयोग करने वाले 551 लोगों की पहचान की जा चुकी है।
इस जानकारी पर सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब संबंधित लोगों की पहचान हो चुकी है तो अब तक उन्हें हिरासत में क्यों नहीं लिया गया। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में एहतियाती हिरासत का उपयोग किया जाना चाहिए ताकि अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त संदेश जाए और अन्य लोग भी इस तरह के अपराध करने से बचें। अदालत ने यह भी कहा कि कुछ मामलों में कड़ी कार्रवाई उदाहरण बन सकती है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी जोर दिया। अदालत ने कहा कि चंबल नदी और उसकी सहायक नदियों का प्राकृतिक प्रवाह बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि प्रकृति के साथ अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं किया जाए तो वह स्वयं अपना संतुलन बनाए रख सकती है। लेकिन जो लोग अवैध खनन के जरिए पर्यावरण और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचा रहे हैं उनके प्रति किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य केवल एक संरक्षित क्षेत्र नहीं बल्कि कई दुर्लभ और संकटग्रस्त जलीय जीवों का महत्वपूर्ण आवास भी है। ऐसे में अवैध रेत खनन से नदी का स्वरूप बदलता है और जैव विविधता पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण के लिए सख्त और प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।
सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों ने अदालत के समक्ष अवैध खनन रोकने के लिए दर्ज एफआईआर जब्ती की कार्रवाई और अन्य कदमों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। हालांकि अदालत इन प्रयासों से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आई और स्पष्ट किया कि केवल आंकड़े पेश करने से समस्या का समाधान नहीं होगा बल्कि जमीन पर प्रभावी कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने तीनों राज्यों को अवैध रेत खनन रोकने के लिए और अधिक कठोर कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि चंबल क्षेत्र के पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा हो सके।
मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी। इस दौरान अदालत तीनों राज्य सरकारों से अब तक की गई कार्रवाई और आगे की रणनीति पर विस्तृत रिपोर्ट भी देखेगी।
