खरगे ने कहा कि देश के छात्र और युवा लंबे समय से बेहतर शिक्षा व्यवस्था, निष्पक्ष परीक्षाओं और रोजगार की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार कई प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों का विश्वास प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में केवल नई घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि दोषियों के खिलाफ समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है ताकि युवाओं का भरोसा फिर से कायम हो सके।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार के कार्यकाल में छात्रों के आंदोलनों के दौरान कई स्थानों पर बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले युवाओं के साथ कठोर व्यवहार किया गया, जबकि लोकतंत्र में अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि छात्रों की समस्याओं को कानून-व्यवस्था का विषय बनाने के बजाय संवाद और संवेदनशीलता के साथ समाधान तलाशा जाए।
खरगे ने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें भी दोहराईं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए, छात्रों पर हुई कार्रवाई के लिए सरकार सार्वजनिक रूप से माफी मांगे और जिन विद्यार्थियों को कार्रवाई का सामना करना पड़ा है, उन्हें न्याय सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना था कि युवाओं का भविष्य किसी भी राजनीतिक मतभेद से ऊपर होना चाहिए और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। खरगे का आरोप है कि देश में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर अपेक्षित गति से नहीं बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्थायी नौकरियों की संख्या सीमित होती जा रही है, जबकि संविदा आधारित नियुक्तियों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। उनके अनुसार उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिससे भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों को शीघ्र एवं कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री के इसी बयान के बाद कांग्रेस अध्यक्ष की प्रतिक्रिया सामने आई है, जिससे शिक्षा, परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।
