बुन्देलखण्ड की कला को मिलेगा नया मंच, 31वें दीक्षांत समारोह के अंतर्गत आगामी आयोजनों का शुभारंभ
झांसी। बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी के ललित कला संस्थान द्वारा आयोजित होने वाली बहुप्रतीक्षित ‘बुंदेली वसुधा’ कार्यशाला एवं ‘फाइन आर्ट फेयर–2026’ के आधिकारिक पोस्टर का मंगलवार को गरिमामय वातावरण में विमोचन किया गया। पोस्टर का लोकार्पण विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं शैक्षणिक अधिकारियों, शिक्षकों एवं कला जगत से जुड़े गणमान्यजनों की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह को विशेष महत्व प्रदान किया।

पोस्टर विमोचन के साथ ही आगामी आयोजन की औपचारिक शुरुआत हुई। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने इसे केवल एक औपचारिक अनावरण न मानते हुए कला, संस्कृति और रचनात्मक चेतना के नए अध्याय का शुभारंभ बताया। वक्ताओं ने कहा कि ललित कला समाज की सांस्कृतिक स्मृतियों, लोक परंपराओं और समकालीन विचारों को अभिव्यक्ति देने का सशक्त माध्यम है तथा ऐसे आयोजन युवा पीढ़ी को अपनी सृजनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ समाज और संस्कृति से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।

समारोह में कुलसचिव श्री ज्ञानेंद्र कुमार, संकायाध्यक्ष प्रो. पुनीत बिसारिया, उप कुलसचिव श्री सुनील कुमार सेन, उप कुलसचिव शेख अंजुम, प्रो. मुन्ना तिवारी, प्रो. एस.पी. सिंह, डॉ. जितेंद्र बबेले, डॉ. कौशल त्रिपाठी, श्री गोविंद यादव सहित ललित कला संस्थान के समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने आयोजन की संकल्पना की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन बुन्देलखण्ड की कला एवं सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर नई प्रतिष्ठा प्रदान करेगा।
समारोह के दौरान आयोजकों ने बताया कि ‘बुंदेली वसुधा’ कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बुन्देलखण्ड की समृद्ध लोक संस्कृति, लोक परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य एवं सांस्कृतिक विरासत को ललित कला के विविध माध्यमों के माध्यम से सृजनात्मक अभिव्यक्ति प्रदान करना है। यह कार्यशाला युवा कलाकारों, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को अनुभवी कलाकारों के मार्गदर्शन में अपनी कलात्मक क्षमता विकसित करने, पारंपरिक और समकालीन कला के बीच संवाद स्थापित करने तथा स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का अवसर उपलब्ध कराएगी।
वहीं ‘फाइन आर्ट फेयर–2026’ का उद्देश्य कलाकारों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, कला संग्राहकों एवं कला प्रेमियों के लिए एक ऐसा सशक्त मंच तैयार करना है, जहाँ चित्रकला, मूर्तिकला, ग्राफिक कला, प्रिंटमेकिंग तथा समकालीन कला की विविध विधाओं का प्रदर्शन, बिक्री एवं रचनात्मक संवाद एक ही छत के नीचे संभव हो सके। आयोजकों के अनुसार यह आयोजन स्थानीय एवं युवा कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करेगा, कला के क्षेत्र में स्वरोजगार एवं व्यावसायिक संभावनाओं को प्रोत्साहित करेगा, कला संग्रहण और विपणन की संस्कृति को बढ़ावा देगा तथा बुन्देलखण्ड की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही यह आयोजन कला, शिक्षा, संस्कृति और समाज के मध्य एक सशक्त सेतु का कार्य करते हुए क्षेत्र में रचनात्मक वातावरण के निर्माण तथा सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई गति प्रदान करेगा।
समारोह के दौरान उपस्थित अतिथियों ने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी आयोजन कला और संस्कृति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा तथा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ देशभर के प्रतिष्ठित कलाकारों से संवाद एवं सीखने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल कलात्मक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि क्षेत्रीय सांस्कृतिक अस्मिता के संरक्षण एवं संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के अंत में आयोजन की समन्वयक डॉ. श्वेता पांडेय ने सभी अतिथियों, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकगण एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग, विश्वास एवं मार्गदर्शन से यह आयोजन निश्चित रूप से सफल होगा और बुन्देलखण्ड की सांस्कृतिक एवं कलात्मक विरासत को राष्ट्रीय परिदृश्य पर नई पहचान दिलाने में सार्थक भूमिका निभाएगा। उन्होंने कलाकारों, विद्यार्थियों एवं कला प्रेमियों से आगामी ‘बुंदेली वसुधा’ कार्यशाला एवं ‘फाइन आर्ट फेयर–2026’ में सक्रिय सहभागिता का आह्वान करते हुए कहा कि यह आयोजन सृजन, संवाद और सांस्कृतिक चेतना का एक विराट उत्सव सिद्ध होगा।
