बैठक के दौरान भारत ने यह भी दोहराया कि दोनों देशों के बीच संबंध आपसी सम्मान, समान हितों और संवेदनशीलता के सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और चीन जैसे बड़े तथा प्रभावशाली पड़ोसी देशों के बीच स्थिर और संतुलित संबंध केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एशिया और वैश्विक स्तर पर भी उनका व्यापक प्रभाव पड़ता है। इसलिए दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को मजबूत करने के लिए संवेदनशील मुद्दों का समाधान जिम्मेदारी और संवाद के माध्यम से किया जाना आवश्यक है।
विदेश मंत्री ने सीमा क्षेत्रों में हालात सुधारने के लिए पिछले कुछ समय में उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने विभिन्न स्तरों पर संवाद और समन्वय के जरिए कई सकारात्मक पहल की हैं। इसके बावजूद सीमा क्षेत्रों में स्थायी शांति बनाए रखने के लिए सैन्य और राजनयिक तंत्र के बीच निरंतर संपर्क तथा सक्रिय सहयोग की आवश्यकता बनी हुई है। उन्होंने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के तनाव की संभावना कम हो सके।
भारत ने बैठक के दौरान आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। विदेश मंत्री ने कहा कि भारतीय कंपनियों को चीन के बाजार में निष्पक्ष और पारदर्शी अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार असंतुलन पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे संतुलित करने की आवश्यकता बताई। साथ ही उन्होंने भरोसेमंद और स्थिर सप्लाई चेन की अहमियत पर बल देते हुए कहा कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए आर्थिक सहयोग को अधिक पारदर्शी और संतुलित बनाना समय की मांग है।
बैठक में दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क बढ़ाने की आवश्यकता पर भी सहमति जताई गई। विदेश मंत्री ने कहा कि नियमित संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, यात्रा सुविधाओं में सुधार और विभिन्न द्विपक्षीय तंत्रों की सक्रिय बैठकों से आपसी विश्वास को और मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर संवाद बनाए रखना भविष्य के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उन्हें विवाद या टकराव में बदलने से रोकना दोनों पक्षों की साझा जिम्मेदारी है। विदेश मंत्री ने कहा कि संवाद और कूटनीति ही ऐसे मुद्दों का सबसे प्रभावी समाधान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत रचनात्मक सहयोग और सकारात्मक संबंधों का पक्षधर है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा की स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
हाल के समय में दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में संवाद और सहयोग बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक पहल देखने को मिली है। हालांकि भारत का स्पष्ट मानना है कि सीमा पर स्थायी शांति और विश्वास का वातावरण ही भविष्य में मजबूत, संतुलित और दीर्घकालिक भारत-चीन संबंधों की वास्तविक आधारशिला बन सकता है।
