नई दिल्ली। वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन (Global Electronics Supply Chain) में चीन (China) का विकल्प बनने के लिए भारत (India) ने एक और बड़ा कदम उठाया है। देश जल्द ही चिप पैकेजिंग (Chip Packaging) के वैश्विक केंद्र के तौर पर उभरेगा। निर्माताओं को भारत में चिप निर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए आकर्षित करने के प्रयास किए जाएंगे।
सरकार कंपनियों को यूनिट लगाने पर पूंजीगत व्यय का 35 फीसदी तक वित्तीय सहायता देगी। पारंपरिक पैकेजिंग इकाइयों को यह सहायता 25 फीसदी तक होगी। इससे वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत की स्थिति मजबूत होगी। सरकार का मानना है कि केवल चिप निर्माण ही नहीं, बल्कि उनकी टेस्टिंग और पैकेजिंग भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
नई रणनीति से यूं आएगा बदलाव
नई रणनीति के तहत विश्व-स्तरीय अग्रणी कंपनियां जैसे इंटेल, लॉकहीड मार्टिन और एप्लाइड मैटेरियल्स ने भारत में निवेश में रुचि दिखाई है। नई पैकेजिंग और टेस्टिंग इकाइयां शुरू होने से इलेक्ट्रॉनिक्स, हार्डवेयर और इंजीनियरिंग क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे। ऑटोमोबाइल, स्मार्टफोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रक्षा उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली चिप्स के लिए भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी।
सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में एटीएमपी यानी असेंबली, टेस्टिंग, पैकेजिंग यूनिट व ओएसएटी यानी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर, असेंबली टेस्ट इकाइयों को स्वीकृति मिल गई है। सेमिकॉन 2.0 के तहत कम्प्यूटिंग, मेमोरी, पावर, नेटवर्किंग व सेंसर जैसे निर्माण खंडों की पहचान की गई है। देश की पहली फैब यूनिट 2028 में शुरू होने की उम्मीद है। पहली कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट और पहली थ्री डी ग्लास सब्सट्रेट पैकेजिंग सुविधा स्थापित की जा रही है। अगली पीढ़ी की पैकेजिंग तकनीक आकर्षित करने के लिए सब्सिडी की व्यवस्था की गई है, ताकि दिग्गज सेमीकंडक्टर कंपनियां भारत में निवेश के लिए आकर्षित हों।
