लगातार हुई इन बैठकों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या शरद पवार की पार्टी सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के करीब आ रही है। हालांकि दोनों नेताओं ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि मुलाकात का राजनीतिक गठबंधन से कोई संबंध नहीं है।
जयंत पाटिल ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि उनकी शिंदे से मुलाकात क्षेत्र के विकास कार्यों और शहरी विकास विभाग से जुड़े लंबित मामलों को लेकर थी। उन्होंने बताया कि एक नगर परिषद अध्यक्ष की अयोग्यता के खिलाफ दायर अपील पर भी चर्चा की गई।
वहीं, जितेंद्र आव्हाड ने भी कहा कि इतने लंबे राजनीतिक अनुभव वाला कोई भी नेता यदि किसी बड़े राजनीतिक गठबंधन पर चर्चा करना चाहता है, तो वह इस तरह सार्वजनिक रूप से मुलाकात नहीं करेगा। उनके मुताबिक, इन बैठकों को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक कयास बेबुनियाद हैं।
आव्हाड ने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र के नगर परिषद अध्यक्ष को अयोग्य ठहराने की कार्रवाई सत्तारूढ़ गठबंधन की दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। उनका कहना है कि इस फैसले के जरिए उन्हें राजनीतिक रूप से झुकाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल जानबूझकर ऐसी अफवाहें फैला रहे हैं ताकि जयंत पाटिल की साफ-सुथरी छवि को नुकसान पहुंचे और पार्टी अध्यक्ष शरद पवार के प्रति उनकी निष्ठा पर सवाल खड़े किए जा सकें। आव्हाड ने कहा कि वे केवल इस पूरे मामले को राज्य के शीर्ष नेतृत्व के सामने रख रहे हैं, क्योंकि इतना बड़ा प्रशासनिक फैसला मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की जानकारी के बिना संभव नहीं हो सकता।
