मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में एक नया लो प्रेशर एरिया (कम दबाव का क्षेत्र) विकसित हो रहा है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के ऊपर तीन साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हैं। इन मौसम प्रणालियों के प्रभाव से आगामी दिनों में वर्षा की गतिविधियों में तेजी आने के संकेत हैं।
मौसम विभाग ने बताया कि 19 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) भी सक्रिय होगा। इसके प्रभाव से प्रदेश में फिर से तेज बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है।
प्रदेश में पिछले नौ दिनों से कहीं भी उल्लेखनीय भारी बारिश दर्ज नहीं हुई है। इसका असर मानसून के कुल वर्षा आंकड़ों पर भी दिखाई दे रहा है। अब तक मध्य प्रदेश में 243.3 मिमी (9.6 इंच) वर्षा हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य औसत 281.3 मिमी (11.1 इंच) होना चाहिए था। यानी प्रदेश में अब तक 13 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।
यदि क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 26 प्रतिशत कम वर्षा हुई है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी बारिश सामान्य से 2 प्रतिशत कम दर्ज की गई है।
इन जिलों में बारिश की संभावना
मौसम विभाग ने बालाघाट और डिंडौरी में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं आलीराजपुर, धार, बड़वानी, इंदौर, खरगोन, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, बैतूल, नर्मदापुरम, रायसेन, सागर, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, दमोह, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, भिंड, दतिया, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, जबलपुर, सिवनी, मंडला, अनूपपुर और उमरिया में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है।
वहीं ग्वालियर, भोपाल, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम और झाबुआ में फिलहाल उमस और गर्मी का असर बना रहने की संभावना है।
मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल प्रदेश में मानसून की स्थिति संतोषजनक है, लेकिन वर्षा की कमी कृषि और जल संसाधनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। आगामी दिनों में सक्रिय हो रही निम्न दाब प्रणाली की दिशा और तीव्रता तय करेगी कि मानसून कितनी तेजी से दोबारा सक्रिय होता है। यदि मौसम प्रणालियां अनुकूल रहीं, तो जुलाई के दूसरे पखवाड़े में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।
