पार्टी नेता की ओर से सुनेत्रा पवार के अध्यक्ष पद के चुनाव को चुनौती देते हुए कानूनी नोटिस जारी किया गया है। हालांकि, इस मामले पर अभी तक उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
26 फरवरी के चुनाव पर उठाई गई आपत्ति
दिल्ली स्थित विधि फर्म एआरएस एसोसिएट्स ने NCP के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह की ओर से 9 जुलाई को यह कानूनी नोटिस जारी किया। इसमें दावा किया गया है कि 26 फरवरी को हुआ पार्टी अध्यक्ष का चुनाव असंवैधानिक था और इसे अमान्य घोषित किया जाना चाहिए। यह नोटिस सुनेत्रा पवार, NCP के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव को भेजा गया है।
चुनाव प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन का आरोप
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि चुनाव प्रक्रिया शुरू करने से पहले पार्टी संविधान में तय अनिवार्य नियमों का पालन नहीं किया गया। इसमें दावा किया गया कि पार्टी प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों को चुनाव की जानकारी भी विधिवत नहीं दी गई।
नोटिस के अनुसार, तत्कालीन NCP अध्यक्ष अजित पवार के 28 जनवरी को निधन के बाद पार्टी ने निर्वाचन आयोग को जानकारी दी थी कि नए अध्यक्ष के चुनाव तक प्रफुल्ल पटेल कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका निभाएंगे। आरोप है कि इसके बावजूद महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव ने बिना संवैधानिक अधिकार के राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया और चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी।
नामांकन और मतदान प्रक्रिया पर भी सवाल
सच्चिदानंद सिंह की ओर से जारी नोटिस में दावा किया गया है कि पार्टी संविधान के मुताबिक न तो केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण का गठन किया गया, न ही निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया और न ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया गया। नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रतिनिधियों को उम्मीदवारों के नामांकन, चुनाव लड़ने और मतदान करने का उचित अवसर नहीं दिया गया।
चुनाव आयोग को भेजे पत्र वापस लेने की मांग
सिंह ने निर्वाचन आयोग को भेजे गए 28 फरवरी, 10 मार्च और 29 अप्रैल के पार्टी पत्रों को वापस लेने की मांग की है। इन पत्रों में चुनाव और पार्टी पदाधिकारियों से जुड़ी जानकारी दर्ज की गई थी।
उन्होंने स्वतंत्र चुनाव प्राधिकरण की निगरानी में नए सिरे से संगठनात्मक चुनाव कराने की मांग की है। नोटिस में पार्टी नेतृत्व को मांगों पर कार्रवाई के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। ऐसा नहीं होने पर आगे कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखने की बात कही गई है।
NCP ने आरोपों को बताया गलत
वहीं, NCP प्रवक्ता सूरज चव्हाण ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि सच्चिदानंद सिंह 26 फरवरी को आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में मौजूद थे और उन्होंने हाथ उठाकर सुनेत्रा पवार के पक्ष में मतदान किया था। चव्हाण ने दावा किया कि सुनेत्रा पवार का चुनाव सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कराया गया था। फिलहाल NCP में अध्यक्ष पद को लेकर उठे इस विवाद पर आगे की स्थिति कानूनी प्रक्रिया और पार्टी के रुख पर निर्भर करेगी।
