जांच के दौरान खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कई कथित अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है। इनमें एक प्रमुख मामला ऐसे अंडों की बिक्री का बताया गया है, जिन्हें उस ब्रांड नाम के तहत बेचा जा रहा था जो कंपनी के मौजूदा खाद्य लाइसेंस में स्वीकृत उत्पाद श्रेणी के अंतर्गत शामिल नहीं था। नियामक ने निर्देश दिया है कि वैध अनुमति प्राप्त होने तक ऐसे उत्पादों की बिक्री तत्काल प्रभाव से रोकी जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर लाइसेंस में संशोधन के लिए आवेदन किया जाए।
शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ पैक्ड खाद्य उत्पाद एक्सपायरी तिथि समाप्त होने के बाद भी ग्राहकों तक पहुंचाए गए। इनमें प्रोटीन सप्लीमेंट और नमकीन जैसे उत्पाद शामिल बताए गए हैं। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार एक्सपायर्ड उत्पादों की बिक्री या आपूर्ति उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है। इसी कारण नियामक ने इस मामले को विशेष रूप से गंभीरता से लिया है।
एक अन्य शिकायत में ऑर्गेनिक अंडों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि ग्राहकों को ऐसे अंडे उपलब्ध कराए गए जिनमें सड़न, दुर्गंध और संक्रमण जैसे संकेत मौजूद थे, जिससे वे मानव उपभोग के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त हो गए थे। इसी प्रकार एक तैयार खाद्य उत्पाद के खराब और बदबूदार होने की भी शिकायत दर्ज की गई, जिसके बाद उसकी गुणवत्ता और भंडारण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं।
जांच के दौरान यह आरोप भी सामने आया कि शिकायत दर्ज होने और संबंधित मामले की जानकारी दिए जाने के बावजूद प्रभावी सुधारात्मक कदम समय पर नहीं उठाए गए। इसके अतिरिक्त शिशुओं के लिए तैयार एक खाद्य उत्पाद के खराब और असुरक्षित स्थिति में मिलने की शिकायत भी दर्ज हुई। इतना ही नहीं, एक मामले में ग्राहक द्वारा दोषपूर्ण उत्पाद लौटाने के बाद वही उत्पाद दोबारा आपूर्ति किए जाने का भी आरोप लगाया गया है, जिसे नियामक ने गंभीर लापरवाही की श्रेणी में माना है।
एफएसएसएआई ने कंपनी से उसके खाद्य सुरक्षा प्रबंधन तंत्र, गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया, शिकायत निवारण व्यवस्था और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अपनाए जाने वाले उपायों की विस्तृत जानकारी मांगी है। साथ ही प्रत्येक शिकायत पर की गई कार्रवाई और सुधारात्मक कदमों का पूरा विवरण भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
नियामक ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जाती है तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह कार्रवाई उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराने और खाद्य सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
