शरद पवार महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद के मुद्दे पर महाराष्ट्र एकीकरण समिति की बैठक में शामिल होने के लिए विधान भवन पहुंचे थे। बैठक के बाद वे सीधे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय पहुंचे। इस दौरान उनके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता जयंत पाटील, जितेंद्र आव्हाड और शशिकांत शिंदे भी मौजूद थे।
उस समय एकनाथ शिंदे कैबिनेट बैठक में व्यस्त थे, लेकिन पवार के पहुंचने की जानकारी मिलते ही उन्होंने बैठक बीच में रोककर उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच करीब 15 मिनट तक बातचीत हुई। राजनीतिक हलकों में इसे शिंदे की ओर से शरद पवार के प्रति सम्मान और संवाद की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
मुलाकात के बाद शिंदे दोबारा कैबिनेट बैठक में लौट गए, जबकि शरद पवार कुछ देर तक उनके कार्यालय में रुककर अपने विधायकों के साथ चर्चा करते रहे।
हाल के दिनों में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुए थे। इसके बाद यह अटकलें भी लगाई जा रही थीं कि शिंदे की नजर अब शरद पवार गुट के जनप्रतिनिधियों पर भी हो सकती है। ऐसे माहौल में पवार का स्वयं शिंदे के कार्यालय पहुंचना कई राजनीतिक संदेशों से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात से शरद पवार ने अपने विधायकों और नेताओं को यह संकेत देने की कोशिश की कि पार्टी नेतृत्व हर राजनीतिक गतिविधि पर नजर बनाए हुए है। इससे संभावित टूट-फूट की अटकलों के बीच पार्टी कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों का मनोबल बनाए रखने का प्रयास भी माना जा रहा है।
इस मुलाकात को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए भी एक अप्रत्यक्ष राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। फडणवीस के बजाय सीधे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात कर पवार ने यह संकेत दिया कि वे सत्ता पक्ष के सभी प्रमुख नेताओं के साथ संवाद बनाए रखने की क्षमता रखते हैं। राजनीतिक मामलों में बातचीत के रास्ते खुले रखने की रणनीति शरद पवार की पहचान मानी जाती है।
हालांकि, इस 15 मिनट की बातचीत में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसका खुलासा अब तक किसी भी पक्ष ने नहीं किया है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को आगामी राजनीतिक समीकरणों और रणनीतियों से जोड़कर देख रहे हैं। आने वाले दिनों में ही इस मुलाकात के वास्तविक राजनीतिक मायने स्पष्ट हो सकेंगे।
