बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास व्हीलचेयर पर पहुंचकर शामिल हुए। महासचिव चंपत राय भी बैठक में मौजूद रहे जबकि अनिल मिश्रा बैठक शुरू होने तक नहीं पहुंचे। जानकारी के अनुसार ट्रस्ट के कुछ पदेन सदस्य और केंद्र तथा उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि भी प्रत्यक्ष रूप से बैठक में शामिल नहीं हुए और उनके ऑनलाइन जुड़ने की संभावना जताई गई।
बताया जा रहा है कि चढ़ावा चोरी की घटना सार्वजनिक होने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया था। ट्रस्ट की बैठक में इन इस्तीफों को स्वीकार करने या आगे की कार्रवाई को लेकर विचार किया जा रहा है। ट्रस्ट में कुल 14 सदस्य हैं जिनमें चार पदेन सदस्य शामिल हैं। किसी भी प्रस्ताव को पारित करने के लिए दो तिहाई सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है जबकि पदेन सदस्यों के मतों की गणना नहीं की जाती।
बैठक से पहले ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने एक बयान जारी कर कहा कि मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना से वे बेहद आहत हैं। उन्होंने कहा कि जिसने भी ऐसा महापाप किया है उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता।
बैठक के दौरान ट्रस्ट के सदस्यों ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम पर भरोसा जताया। उनका कहना था कि इस घटना से देशभर में गलत संदेश गया है और करोड़ों रामभक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है।
सूत्रों के अनुसार यदि महासचिव पद पर बदलाव होता है तो विश्व हिंदू परिषद के बजरंग बागड़ा का नाम सामने आ सकता है। वहीं ट्रस्टी पद के लिए नीरज दौनेरिया के नाम पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इन संभावित नियुक्तियों पर अंतिम निर्णय ट्रस्ट की बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा।
इस बीच चढ़ावा चोरी मामले की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ पहले ही खारिज कर चुकी है। अदालत ने कहा कि इसी विषय से संबंधित मामला पहले से सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में अब सभी की निगाहें ट्रस्ट की बैठक में लिए जाने वाले निर्णय और जांच की अगली दिशा पर टिकी हुई हैं।
