अभिजीत दीपके का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है, जिसमें वह छात्रों और समर्थकों को संबोधित करते हुए कहते हैं कि यह आंदोलन जल्द समाप्त होने वाला नहीं है। ऐसे में सभी लोगों का लंबे समय तक सक्रिय और स्वस्थ रहना आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि बड़ी संख्या में छात्र लगातार अनशन करते रहेंगे तो आंदोलन की संगठनात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है।
दीपके ने अपने संदेश में कहा कि सोनम वांगचुक को लंबे समय तक शांतिपूर्ण आंदोलनों और अनशन का अनुभव है, इसलिए वह इस जिम्मेदारी को बेहतर ढंग से निभा सकते हैं। वहीं छात्रों और अन्य समर्थकों को अपनी ऊर्जा आंदोलन के संचालन, जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों में लगानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी आंदोलन की सफलता केवल अनशन पर नहीं, बल्कि लगातार सक्रिय जनभागीदारी और समन्वित प्रयासों पर भी निर्भर करती है।
प्रदर्शन के दौरान सोनम वांगचुक ने भी आंदोलन का समर्थन करने वाले लोगों से संयमित जीवनशैली अपनाने और प्रतीकात्मक रूप से एक दिन का उपवास रखने की अपील की। उनका कहना है कि यदि समर्थक बारी-बारी से एक दिन का उपवास करें तो आंदोलन के प्रति एकजुटता का संदेश भी जाएगा और प्रदर्शन स्थल पर भोजन की व्यवस्था का दबाव भी कम होगा। उन्होंने भोजन में संतुलन और अनुशासन को अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बताया।
जानकारी के अनुसार, लंबे समय से जारी अनशन के कारण सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ा है और उनका वजन कम हुआ है। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया है। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
जंतर-मंतर पर जारी यह आंदोलन लगातार लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। प्रदर्शन में शामिल छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। वहीं आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधि लगातार यह भी प्रयास कर रहे हैं कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण बना रहे और इसमें शामिल लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
इसी उद्देश्य से अभिजीत दीपके ने छात्रों से अपील की है कि वे अपनी जान जोखिम में डालने के बजाय आंदोलन को अन्य माध्यमों से मजबूत करें। उनका मानना है कि किसी भी जनआंदोलन की सबसे बड़ी ताकत उसके सक्रिय और स्वस्थ कार्यकर्ता होते हैं। ऐसे में लंबी अवधि के संघर्ष के लिए संयम, संगठन और सतत भागीदारी सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।
