10 दिन में पूरा होगा 700 किलोमीटर का सफर
कानपुर से इंदौर की दूरी करीब 700 किलोमीटर है। नेशनल जू अथॉरिटी के दिशा-निर्देशों के अनुसार वन्यजीवों को ले जाने वाले वाहनों की अधिकतम गति 70 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है। रास्ते में निर्धारित पड़ाव और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए हिप्पो ‘सतीश’ को इंदौर पहुंचने में करीब 10 दिन लगने का अनुमान है।
दरियाई घोड़े के लिए पानी क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञों के अनुसार, दरियाई घोड़ा अपने जीवन का लगभग 80 प्रतिशत समय पानी में बिताता है। लंबे समय तक धूप और गर्म हवा के संपर्क में रहने से उसकी त्वचा सूख सकती है, फट सकती है और स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसी कारण पूरे सफर के दौरान उसके शरीर को लगातार नम बनाए रखने की विशेष व्यवस्था की गई है।
पिंजरे के ऊपर लगाए जाएंगे दो बड़े पानी के ड्रम
इंदौर चिड़ियाघर प्रशासन हिप्पो के परिवहन के लिए विशेष डिजाइन का पिंजरा तैयार कर रहा है। पिंजरे के ऊपर 100-100 लीटर क्षमता वाले दो बड़े पानी के ड्रम लगाए जाएंगे। इन ड्रमों से यात्रा के दौरान लगातार हिप्पो के शरीर पर पानी का छिड़काव किया जाएगा, ताकि उसकी त्वचा में नमी बनी रहे और उसे गर्मी से राहत मिलती रहे।
रास्ते में तय किए गए विशेष पड़ाव
यात्रा के दौरान वाहन किन स्थानों पर रुकेगा, इसकी भी पहले से योजना बनाई जा रही है। कानपुर चिड़ियाघर प्रशासन के अनुसार, केवल ऐसे हाईवे ढाबों और पड़ावों का चयन किया जा रहा है जहां पर्याप्त पानी की उपलब्धता हो और गहरे ट्यूबवेल चालू अवस्था में हों।
हर पड़ाव पर पाइप की मदद से हिप्पो को अच्छी तरह नहलाया जाएगा। साथ ही पिंजरे पर लगे पानी के ड्रमों को भी दोबारा भरा जाएगा। अनुमान है कि पूरी 10 दिन की यात्रा में नहलाने और ड्रम भरने सहित कुल करीब 20 हजार लीटर पानी का उपयोग होगा।
शेरनी के बदले इंदौर जाएगा ‘सतीश’
कानपुर चिड़ियाघर प्रशासन के मुताबिक, वहां शेरों की संख्या पर्याप्त है, लेकिन शेरनियों की कमी के कारण प्रजनन कार्यक्रम प्रभावित हो रहा था। दूसरी ओर, इंदौर चिड़ियाघर को एक स्वस्थ दरियाई घोड़े की जरूरत थी।
कानपुर में एक से अधिक हिप्पो मौजूद हैं, लेकिन इंदौर की टीम ने स्वास्थ्य और व्यवहार के आधार पर ‘सतीश’ को चुना है। दोनों चिड़ियाघरों के बीच एक्सचेंज प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जा चुका है और अब केवल स्थानांतरण की तारीख तय होना बाकी है।
