अप्रैल में दर्ज हुई थी FIR
यह मामला अप्रैल में दिए गए कथित भाषण से जुड़ा है, जिसके बाद बिधाननगर नॉर्थ थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले की जांच कर रही पुलिस ने अदालत से अभिषेक बनर्जी का वॉयस सैंपल लेने की अनुमति मांगी थी। इस पर उत्तर 24 परगना जिले की अदालत ने उन्हें 8 जुलाई को अदालत में उपस्थित होकर अपनी आवाज का नमूना देने का आदेश दिया।
मजिस्ट्रेट के सामने लिया जाएगा वॉयस सैंपल
सूत्रों के अनुसार, सरकारी वकील मोहम्मद सबीर अली ने बताया कि अदालत के निर्देश के मुताबिक अभिषेक बनर्जी बिधाननगर कोर्ट में मजिस्ट्रेट के समक्ष अपना वॉयस सैंपल देंगे। इसके बाद पुलिस जांच को आगे बढ़ाएगी और वॉयस सैंपल का उपयोग साक्ष्यों के सत्यापन के लिए किया जाएगा।
BNSS की धारा 349 के तहत पुलिस ने मांगी थी अनुमति
पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 349 के तहत अदालत से वॉयस सैंपल लेने की अनुमति मांगी थी। इस प्रावधान के अनुसार, मजिस्ट्रेट किसी भी व्यक्ति को जांच या आपराधिक मामले की सुनवाई के लिए हस्ताक्षर, लिखावट या वॉयस सैंपल देने का निर्देश दे सकता है। इसी आधार पर अदालत ने यह आदेश पारित किया।
हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
अभिषेक बनर्जी ने पुलिस के वॉयस सैंपल संबंधी नोटिस को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने एफआईआर रद्द करने की भी मांग की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने नोटिस पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कोई अंतरिम राहत नहीं दी।
जस्टिस तीर्थंकर घोष ने यह कहते हुए याचिका दूसरी पीठ को स्थानांतरित कर दी कि इसी प्रकार का मामला पहले से हाईकोर्ट की दूसरी बेंच के समक्ष लंबित है।
31 जुलाई तक कठोर कार्रवाई से मिली है राहत
मामले की सुनवाई फिलहाल जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष चल रही है। अदालत ने 21 मई को अभिषेक बनर्जी को इस एफआईआर के संबंध में 31 जुलाई तक किसी भी कठोर कार्रवाई से अंतरिम राहत प्रदान की थी। हालांकि, वॉयस सैंपल देने के ताजा निर्देश के बाद मामले की जांच अब अगले चरण में प्रवेश करेगी।
