प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य स्वीकृत मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। इसके बाद संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर पूछा गया है कि भवन निर्माण के लिए स्वीकृत नक्शा और अन्य आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं या नहीं। यदि अनुमति से जुड़े दस्तावेज समयसीमा के भीतर प्रस्तुत नहीं किए गए, तो अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि संबंधित जमीन लवकुश मिश्रा के राम मंदिर कार्यालय में कार्यरत रहने के दौरान उनकी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर खरीदी गई थी। सरकारी अभिलेखों के अनुसार, यह भूमि 16 अक्टूबर 2025 को सोहावल तहसील के मंगसी परगना क्षेत्र में कमल स्वरूप सिंह से खरीदी गई थी।
रजिस्ट्री के समय इस जमीन का मूल्य 8.8 लाख रुपये दर्ज किया गया था। हालांकि, स्थानीय स्तर पर इसकी वर्तमान बाजार कीमत इससे कहीं अधिक, करीब 25 लाख रुपये बताई जा रही है। इसी भूमि पर निर्माण कार्य चल रहा था, जिसकी वैधता की अब जांच की जा रही है।
गौरतलब है कि राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले की जांच पहले से जारी है। पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं। इसी क्रम में अब आरोपी से जुड़े निर्माण और संपत्ति संबंधी मामलों की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि नोटिस के जवाब में संबंधित पक्ष क्या स्पष्टीकरण देता है। इसके बाद अयोध्या विकास प्राधिकरण आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।
