हाल ही में साझा किए गए वीडियो में उन्होंने शहर के एक प्रमुख चौराहे पर यातायात व्यवस्था का वास्तविक दृश्य दिखाया। वीडियो में मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना, बिना हेलमेट दोपहिया चलाना, रॉन्ग साइड ड्राइविंग, एक बाइक पर तीन लोगों का सफर करना और नाबालिग के वाहन चलाने जैसी कई लापरवाहियां दिखाई गई हैं। उनका कहना है कि ऐसी छोटी दिखने वाली गलतियां ही अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बनती हैं।
वीडियो के माध्यम से उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी समान जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि यातायात नियमों का पालन करके अनेक दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। इसी उद्देश्य से वह लगातार लोगों को जागरूक करने वाले वीडियो तैयार कर रहे हैं।
विवेकानंद तिवारी पहले ट्रैफिक पुलिस में कार्यरत थे और ड्यूटी के दौरान भी सड़क सुरक्षा से जुड़े उनके वीडियो सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए थे। उनके जागरूकता अभियान को व्यापक समर्थन मिला और बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें डिजिटल माध्यमों पर फॉलो करना शुरू किया। समय के साथ उनके वीडियो सड़क सुरक्षा से जुड़े जनजागरूकता अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए।
हालांकि कुछ समय पहले विभाग ने उन्हें लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और सेवा नियमों के उल्लंघन के आरोप में निलंबित कर दिया था। विभागीय जांच में यह भी उल्लेख किया गया कि अनुपस्थिति के दौरान वह सोशल मीडिया पर सक्रिय थे। इसके बाद उन्होंने अपनी ओर से स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए और बताया कि उन्होंने अपनी बीमारी की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई थी।
बाद में उन्होंने स्वेच्छा से पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया। उनका कहना था कि निलंबन की कार्रवाई से उनकी सार्वजनिक छवि प्रभावित हुई है, इसलिए उन्होंने सेवा छोड़ने का निर्णय लिया। विभाग से अलग होने के बाद भी उन्होंने सड़क सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी और स्वतंत्र रूप से जागरूकता अभियान चलाना जारी रखा।
वर्तमान में वह हेलमेट उपयोग, सुरक्षित वाहन संचालन और यातायात नियमों के पालन को लेकर लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से वह सड़क पर दिखाई देने वाली लापरवाहियों को सामने लाते हैं और लोगों से जिम्मेदार नागरिक बनने की अपील करते हैं। उनके हालिया वीडियो को भी बड़ी संख्या में लोग देख रहे हैं और इस पर सड़क सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए कानून के साथ-साथ जनजागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। ऐसे अभियानों से लोगों में यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। शहडोल से सामने आया यह मामला भी इस बात की ओर संकेत करता है कि सड़क सुरक्षा का संदेश किसी पद या वर्दी का मोहताज नहीं होता, बल्कि सामाजिक सहभागिता और व्यक्तिगत पहल के माध्यम से भी प्रभावी बदलाव लाया जा सकता है।
