इसी क्रम में पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन में पाकिस्तान के कई मंत्री, सांसदों के साथ अंतरराष्ट्रीय कानून और जल प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत के फैसले के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करना बताया गया।
इशाक डार बोले- संधि क्षेत्रीय शांति की आधारशिला
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सिंधु जल संधि केवल जल बंटवारे का समझौता नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और सहयोग की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि साझा जल संसाधनों को कभी भी राजनीतिक या रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। डार ने कहा कि यदि पाकिस्तान के अधिकारों से समझौता किया गया तो इसका असर पूरे क्षेत्र की स्थिरता और करीब दो अरब लोगों के हितों पर पड़ सकता है।
बिलावल भुट्टो ने भी उठाई संधि बहाल करने की मांग
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि सिंधु जल संधि किसी एक देश का दूसरे पर एहसान नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच हुआ एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है। उन्होंने कहा कि इस संधि का सम्मान किया जाना चाहिए और इसके प्रावधानों का पालन होना चाहिए।
सीनेटर मुसद्दिक मलिक ने जताई चिंता
सम्मेलन में पाकिस्तान के सीनेटर मुसद्दिक मलिक ने भी भारत के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यदि कोई शक्तिशाली देश किसी अंतरराष्ट्रीय संधि को एकतरफा निलंबित कर सकता है, तो इससे दुनिया भर के अंतरराष्ट्रीय समझौतों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। उनके अनुसार, सिंधु जल संधि विश्व के सबसे मजबूत अंतरराष्ट्रीय समझौतों में से एक मानी जाती है।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने लिया था फैसला
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया था। उस समय भारत ने स्पष्ट किया था कि “खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते।” इसके साथ ही पश्चिमी नदियों पर जलविद्युत और जल प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं को भी तेज गति से आगे बढ़ाया गया।
पानी और आंकड़ों की अनिश्चितता से बढ़ी पाकिस्तान की चिंता
सिंधु नदी प्रणाली का पानी पाकिस्तान की कृषि, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। संधि स्थगित होने के बाद पाकिस्तान को जल प्रवाह की अनिश्चितता के साथ-साथ भारत से मिलने वाली हाइड्रोलॉजिकल जानकारी भी उपलब्ध नहीं हो रही है। इसी कारण पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, भारत का रुख स्पष्ट है कि सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई होने तक सिंधु जल संधि को लेकर पहले जैसी स्थिति बहाल नहीं की जाएगी।
