वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यह निर्णय जीएसटीएटी पोर्टल पर अत्यधिक ट्रैफिक और उससे उत्पन्न तकनीकी समस्याओं को देखते हुए लिया गया है। मंत्रालय के अनुसार, बड़ी संख्या में करदाताओं और हितधारकों ने शिकायत की थी कि पोर्टल पर भारी दबाव के कारण समय पर अपील दाखिल करने में कठिनाई हो रही है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि यह विस्तार केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम की धारा 112(1) और धारा 112(3) के तहत दायर की जाने वाली अपीलों पर लागू होगा। यानी जिन मामलों में करदाता जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाना चाहते हैं, उन्हें अब अतिरिक्त समय उपलब्ध रहेगा।
मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताह में अपील दाखिल करने की प्रक्रिया में अचानक तेजी आई। केवल अंतिम 15 दिनों में करीब 30 हजार अपीलें पोर्टल पर दर्ज की गईं। कुछ दिनों में प्रतिदिन लगभग 5,500 अपीलें दाखिल होने से सिस्टम पर दबाव काफी बढ़ गया, जिसके कारण तकनीकी बाधाएं सामने आईं।
वित्त मंत्रालय ने बताया कि बढ़ती शिकायतों और पोर्टल की क्षमता पर पड़ रहे दबाव का आकलन करने के बाद समय-सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी करदाता को तकनीकी कारणों से अपील दाखिल करने के अधिकार से वंचित न होना पड़े।
गौरतलब है कि सरकार ने सितंबर 2025 में जारी अधिसूचना के माध्यम से 30 जून 2026 को अपील दाखिल करने की अंतिम तारीख तय की थी। हालांकि, अंतिम चरण में अपीलों की संख्या उम्मीद से कहीं अधिक बढ़ने के कारण यह समय-सीमा बढ़ानी पड़ी।
सरकार ने करदाताओं से यह भी आग्रह किया है कि वे अंतिम दिनों तक प्रतीक्षा न करें और समय रहते अपनी अपील दाखिल कर दें। मंत्रालय का कहना है कि इससे पोर्टल पर अचानक भीड़ नहीं बढ़ेगी और तकनीकी व्यवधानों की संभावना भी कम होगी।
इस बीच सरकार के कर संग्रह के आंकड़े भी सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। मई 2026 में सकल जीएसटी संग्रह पिछले वर्ष की तुलना में 3.2 प्रतिशत बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं शुद्ध जीएसटी संग्रह 3.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.67 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
इसी अवधि में जीएसटी रिफंड में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 27,281 करोड़ रुपये रहा। दूसरी ओर, प्रत्यक्ष कर संग्रह के आंकड़े भी मजबूत वृद्धि दर्शाते हैं। आयकर विभाग के अनुसार, 1 अप्रैल से 17 जून 2026 के बीच शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 14.64 प्रतिशत बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 12.46 प्रतिशत बढ़कर 6.10 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि अपील की समय-सीमा बढ़ाने से हजारों करदाताओं को राहत मिलेगी और वे बिना तकनीकी दबाव के अपने मामलों को जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे। साथ ही यह कदम सरकार की उस नीति को भी दर्शाता है, जिसमें कर प्रशासन को अधिक सुगम और करदाता-अनुकूल बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
