डिजिटल मैपिंग और ग्राम स्तर पर जवाबदेही
जल जीवन मिशन 2.0 के तहत राष्ट्रीय डिजिटल फ्रेमवर्क ‘सुजलम भारत’ लागू किया जाएगा। इसके अंतर्गत हर गांव को एक यूनिक ‘सुजल गांव’ या सर्विस एरिया आईडी दी जाएगी, जिससे पानी के स्रोत से लेकर घर तक की पूरी आपूर्ति प्रणाली को डिजिटल रूप से मैप किया जाएगा। ग्राम पंचायत (जीपी) और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) को योजना के क्रियान्वयन और औपचारिक हस्तांतरण में शामिल किया जाएगा, जिसे ‘जल अर्पण’ प्रक्रिया कहा गया है। किसी भी ग्राम पंचायत को ‘हर घर जल’ घोषित करने से पहले यह प्रमाणित करना होगा कि गांव में पानी की आपूर्ति, संचालन और रखरखाव की पर्याप्त व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की गई है।
सरकार की योजना है कि हर साल ‘जल उत्सव’ आयोजित किया जाएगा, जिसमें गांव के लोग मिलकर जल व्यवस्था की समीक्षा और रखरखाव करेंगे। यह समुदाय की भागीदारी और स्वामित्व सुनिश्चित करने का अहम हिस्सा है।
मिशन के असर और सामाजिक लाभ
साल 2019 में मिशन की शुरुआत के समय केवल 3.23 करोड़ ग्रामीण घरों (करीब 17%) में नल से पानी की सुविधा थी। अब तक 12.56 करोड़ नए ग्रामीण घरों को नल का पानी उपलब्ध कराया जा चुका है। वर्तमान में देश के 19.36 करोड़ ग्रामीण घरों में लगभग 15.80 करोड़ घरों (81.61%) में नल से जल कनेक्शन पहुंच चुका है।
सरकार के अनुसार, जल जीवन मिशन केवल पानी की उपलब्धता तक सीमित नहीं रहा। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, योजना के कारण लगभग 9 करोड़ महिलाओं को रोज पानी लाने की मेहनत से राहत मिली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुमान के मुताबिक, इससे महिलाओं के रोजाना श्रम में लगभग 5.5 करोड़ घंटे की बचत हो रही है, और डायरिया से होने वाली लगभग 4 लाख मौतों को रोका जा सकता है। नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर माइकल क्रेमर के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में लगभग 30% तक कमी संभव है, जिससे हर साल करीब 1.36 लाख बच्चों की जान बचाई जा सकेगी।
आईआईएम बेंगलुरु और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अध्ययन के अनुसार, मिशन के जरिए 59.9 लाख प्रत्यक्ष और 2.2 करोड़ अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
सरकार का लक्ष्य है कि जल जीवन मिशन 2.0 के तहत दिसंबर 2028 तक देश के सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल का पानी उपलब्ध कराया जाए और सभी ग्राम पंचायतों को ‘हर घर जल’ प्रमाणित किया जाए। इसे नागरिक-केंद्रित सेवा मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में चौबीसों घंटे सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो।
साथ ही केंद्र सरकार विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ मिलकर ग्रामीण जल आपूर्ति ढांचे के दीर्घकालिक संचालन, रखरखाव और जल स्रोत संरक्षण के लिए समन्वित रणनीति भी लागू करेगी।
