इराक के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति अमेदी ने क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा स्थापित करने के लिए निरंतर बातचीत और आपसी विश्वास को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि लंबित विवादों का समाधान सैन्य टकराव के बजाय कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से ही संभव है। उनका मानना है कि संवाद आधारित पहल से पूरे क्षेत्र में स्थिर और सकारात्मक वातावरण तैयार किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के साथ हुई बैठक में भी यही दृष्टिकोण सामने आया। उन्होंने कहा कि इराक किसी भी प्रकार के संघर्ष को समाप्त करने और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने वाली सभी पहलों का समर्थन करता है। उनके अनुसार युद्ध और टकराव की स्थिति समाप्त होने से क्षेत्र के देशों के लिए आर्थिक विकास, निवेश और जनकल्याण के नए अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इराक शांति और सहयोग पर आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था का पक्षधर है।
ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने संकट की परिस्थितियों में इराक की संतुलित भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि तेहरान अपने पड़ोसी देशों के साथ भरोसे और सहयोग पर आधारित संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया तथा कहा कि साझा चुनौतियों से निपटने के लिए लगातार समन्वय बनाए रखना समय की मांग है।
यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय हुई है जब हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव तेज हो गया था। अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए आरोप लगाया कि होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लगातार चुनौती दी जा रही है। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन घटनाओं ने पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा संबंधी चिंताओं को और बढ़ा दिया।
हालांकि ताजा घटनाक्रम में दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान ने आपसी सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोकने और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े विवादों पर बातचीत के लिए कतर की राजधानी दोहा में बैठक करने पर सहमति जताई है। इस वार्ता का उद्देश्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आगे किसी भी प्रकार के टकराव से बचने के उपाय तलाशना है।
जानकारी के अनुसार, प्रारंभिक योजना के तहत यह वार्ता स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित थी, जहां मुख्य एजेंडा ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे थे। लेकिन होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव को देखते हुए बैठक का स्थान बदलकर दोहा कर दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री व्यापार की निरंतरता को प्राथमिकता देने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे समय में इराक और ईरान के बीच हुई यह उच्चस्तरीय बातचीत पूरे क्षेत्र में संवाद आधारित समाधान को आगे बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल के रूप में देखी जा रही है।
