भारत के विदेश मंत्रालय भारत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से जानकारी दी कि मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान के तहत मोजाम्बिक को आवश्यक राहत सामग्री भेजी गई है। इस सहायता में 500 मीट्रिक टन चावल, अस्थायी आश्रय के लिए टेंट, हाइजीन किट और पुनर्वास कार्यों में उपयोग होने वाली कई जरूरी वस्तुएं शामिल हैं।
इसके अलावा बाढ़ प्रभावित लोगों की तत्काल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए करीब 10 मीट्रिक टन अतिरिक्त राहत सामग्री भी भेजी गई है। राहत अभियान के हिस्से के रूप में Indian Navy के एक जहाज के जरिए लगभग 3 मीट्रिक टन आवश्यक दवाइयां भी मोजाम्बिक पहुंचाई जा रही हैं, ताकि बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों से निपटने में स्थानीय प्रशासन को मदद मिल सके।
भारत इससे पहले भी समुद्री मार्ग के जरिए लगभग 86 मीट्रिक टन जीवन रक्षक दवाइयां मोजाम्बिक भेज चुका है। इन दवाइयों का उद्देश्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और पीड़ित लोगों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बाद सबसे बड़ी चुनौतियों में खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाएं शामिल होती हैं। ऐसे में भारत द्वारा भेजी गई खाद्य सामग्री, स्वच्छता किट और दवाइयां राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
भारत ने अतीत में भी प्राकृतिक आपदाओं के समय कई मित्र देशों की मदद की है। हिंद महासागर क्षेत्र और अफ्रीकी देशों के साथ भारत के मजबूत कूटनीतिक और मानवीय संबंध रहे हैं। आपदा के समय दी जाने वाली यह सहायता इन संबंधों को और मजबूत करने का काम करती है।
भारत ने स्पष्ट किया है कि वह मानवीय, चिकित्सीय और लॉजिस्टिक सहायता देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस पहल के माध्यम से भारत न केवल संकट के समय सहायता पहुंचा रहा है, बल्कि हिंद महासागर और अफ्रीका क्षेत्र में एक जिम्मेदार और भरोसेमंद वैश्विक साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को भी मजबूत कर रहा है।
